उदासी का साया: Furkan S Khan की दर्द भरी ग़ज़ल
Furkan S Khan द्वारा लिखी गई उदासी पर एक मार्मिक ग़ज़ल, जो दिल की गहराइयों को छू जाती है।
हर लम्हा एक उदासी का साया मुझपे छाया है
ज़िंदगी एक वीरान सी लगती है, सूना जहाँ है।
जो कभी थे अपने, वो अब पराये लगते हैं,
दिल में बस इक अजब सा तन्हाई का गुमाँ है।
यादों के धुएँ में खोया रहता हूँ अक्सर,
हर खुशी जैसे बुझ चुकी, बेबस धुआँ है।
चेहरे पे हँसी का मुखौटा है बस, अंदर,
आँखों में नमी और दिल में गम का निशाँ है।
Kaafiya जहाँ, गुमाँ, धुआँ
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
उदासी का साया
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: जहाँ, गुमाँ, धुआँ | Radeef: है
हर लम्हा एक उदासी का साया मुझपे छाया है
ज़िंदगी एक वीरान सी लगती है, सूना जहाँ है।
जो कभी थे अपने, वो अब पराये लगते हैं,
दिल में बस इक अजब सा तन्हाई का गुमाँ है।
यादों के धुएँ में खोया रहता हूँ अक्सर,
हर खुशी जैसे बुझ चुकी, बेबस धुआँ है।
चेहरे पे हँसी का मुखौटा है बस, अंदर,
आँखों में नमी और दिल में गम का निशाँ है।
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