उदासी का साया: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्ज़्म्

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई 'उदासी का साया' नज़्ज़्म् को पढ़ें, जो तन्हाई और खामोशी के एहसास को बयां करती है।

Wednesday, September 2, 2026
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उदासी का साया: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्ज़्म्
“उदासी का साया: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्ज़्म्”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/udasi-ka-saya-furkan-s-khan-nazm
Date
02 September 2026
उदासी का साया: Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली नज़्ज़्म्
Nazm
यह कैसा वीरान सा मंज़र है, हर ओर बस खामोशी छाई हुई है। मेरी आँखों से जो बहते आँसू, उनमें एक तन्हाई समाई हुई है। मेरे होंठ काँपते हैं कुछ कहते हुए, जैसे कोई बात रुकी हुई है।
Kaafiya आँसू, काँपते Radeef हैं
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
दिल में एक अजब सा बोझ भरा है, हर पल एक उदासी का पहरा है। बाहर दुनिया कितनी भी रोशन हो, मेरे मन में तो बस गहरा अँधेरा है। ये कैसा दर्द है जो सहता है, जिसका कोई किनारा नहीं है।
Kaafiya गहरा, अंधेरा Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

वीरान: सुनसान, वीरान, तन्हाई: अकेलापन, एकाकीपन।

बोझ: भार, वज़न, रोशन: प्रकाशमय, चमकीला।

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Zainab Khatoon
लेखक

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