उदासी का साया: फ़ुरकान एस ख़ान की मार्मिक क़ितआ

फ़ुरकान एस ख़ान द्वारा रचित 'उदासी का साया' में गहरे दुख और आंतरिक वेदना का चित्रण। यह क़ितआ उदासी के हर पल के एहसास को बयां करती है।

Sunday, September 6, 2026
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उदासी का साया: फ़ुरकान एस ख़ान की मार्मिक क़ितआ
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06 September 2026
उदासी का साया: फ़ुरकान एस ख़ान की मार्मिक क़ितआ
Qita
दिल में एक कसक सी है, ये कैसी उदासी है, हर शब ये आँसुओं की कहानी सुनाती है। कोई उम्मीद नहीं, कोई सहारा भी नहीं, बस एक खामोशी है जो हर पल सताती है।
Kaafiya उदासी, सुनाती, सताती Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Qita
चेहरे पर हँसी है, मगर दिल उदास है, हर आहट पे लगता है तेरा ही आभास है। ये जुदाई का आलम भी कितना अजीब है, बस एक याद है जो बहुत ही ख़ास है।
Kaafiya उदास, आभास, ख़ास Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

कसक: हल्का दर्द या टीस। शब: रात। उदासी: दुख, मायूसी।

आभास: एहसास, प्रतीति। आलम: अवस्था, स्थिति। जुदाई: बिछड़ना, अलगाव।

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Zainab Khatoon
लेखक

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