ज़िंदगी क्या है: फ़ुरक़ान एस ख़ान की भावपूर्ण ग़ज़ल
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'ज़िंदगी क्या है' शीर्षक ग़ज़ल में जीवन के हर पहलू, उम्मीदों, संघर्षों और रहस्यों को खूबसूरती से बयां किया गया है। जीवन के गहरे अर्थों को समझें।
मंज़र: दृश्य, नज़ारा। समंदर: सागर, विशालता। बेअसर: जिसका कोई प्रभाव न हो। सफ़र: यात्रा। बेखबर: अनजान, जिसे खबर न हो। राज़: रहस्य।
कारवाँ-ए-हयात: जीवन का काफिला। ज़ख्म: घाव। खिले: प्रसन्न हो, विकसित हो। गिले: शिकायतें, शिकवे। मुसाफ़िर: यात्री। फ़ुर्क़त: जुदाई, विरह। महफ़िल: सभा, जमावड़ा। टले: दूर हो, हटे।
बेखुदी: आत्म-विस्मृति, अपनी धुन में। सफ़र: यात्रा। असर: प्रभाव। हुनर: कला, कौशल। बेफिक्र: चिंतामुक्त। पैग़ाम: संदेश। बशर: मनुष्य, मानव जीवन।
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