ज़िंदगी क्या है: फ़ुरक़ान एस ख़ान की भावपूर्ण ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'ज़िंदगी क्या है' शीर्षक ग़ज़ल में जीवन के हर पहलू, उम्मीदों, संघर्षों और रहस्यों को खूबसूरती से बयां किया गया है। जीवन के गहरे अर्थों को समझें।

Thursday, September 3, 2026
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ज़िंदगी क्या है: फ़ुरक़ान एस ख़ान की भावपूर्ण ग़ज़ल
“ज़िंदगी क्या है: फ़ुरक़ान एस ख़ान की भावपूर्ण ग़ज़ल”
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03 September 2026
ज़िंदगी क्या है: फ़ुरक़ान एस ख़ान की भावपूर्ण ग़ज़ल
Ghazal
हर पल बदलता ये मंज़र, ज़िंदगी क्या है? कभी खुशी कभी गम का समंदर, ज़िंदगी क्या है? उम्मीद की किरण है हर इक मोड़ पर, जो ना मिले रोशनी तो फिर बेअसर, ज़िंदगी क्या है? गिरकर संभलना, फिर उठकर चलना है इसका नाम, राहों में रुक जाए जो हर सफ़र, ज़िंदगी क्या है? रंगों से भरी एक किताब है ये जहाँ, बिन पढ़े रह जाए तो फिर बेखबर, ज़िंदगी क्या है? हर साँस में छुपा है एक नया राज़ गहरा, जो ना समझे कोई तो फिर बेअसर, ज़िंदगी क्या है?
Kaafiya मंज़र, समंदर, असर, सफ़र, बेखबर Radeef क्या है
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
ये ज़िंदगी का कारवाँ बस यूँ ही चले, कभी धूप कभी छाँव में राहें मिले। हर ज़ख्म को हँसकर सहना सीख ले, जो दर्द से डरे तो फिर कैसे खिले। शिकायतें बहुत हैं इस दुनिया से मगर, कुछ तो बिना कहे भी दिल से गिले। एक आस है कि मंज़िल मिलेगी कभी, इसी आस पर ये मुसाफ़िर चले। फ़ुर्क़त में भी महफ़िल का अंदाज़ है, जो बिछड़कर भी दिल से न कभी टले।
Kaafiya मिले, खिले, गिले, टले Radeef चले
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
ये ज़िंदगी इक लम्बा सा बेखुदी का सफ़र है, हर मोड़ पर मिलती एक नई ही खबर है। कभी धूप में जलना, कभी छाँव में ठहरना, हर अनुभव का अपना ही गहरा असर है। गिरते हैं संभलते हैं, फिर से उठते हैं हम, ये जीने का ही तो एक अनमोल हुनर है। जो बीत गया वो कल था, जो आएगा वो कल है, आज में जी ले जो, वही तो बेफिक्र है। हर साँस में छुपा है एक नया सा पैग़ाम, गर जान ले कोई तो ये ज़िंदगी बशर है।
Kaafiya सफ़र, खबर, असर, हुनर, बशर Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

मंज़र: दृश्य, नज़ारा। समंदर: सागर, विशालता। बेअसर: जिसका कोई प्रभाव न हो। सफ़र: यात्रा। बेखबर: अनजान, जिसे खबर न हो। राज़: रहस्य।

कारवाँ-ए-हयात: जीवन का काफिला। ज़ख्म: घाव। खिले: प्रसन्न हो, विकसित हो। गिले: शिकायतें, शिकवे। मुसाफ़िर: यात्री। फ़ुर्क़त: जुदाई, विरह। महफ़िल: सभा, जमावड़ा। टले: दूर हो, हटे।

बेखुदी: आत्म-विस्मृति, अपनी धुन में। सफ़र: यात्रा। असर: प्रभाव। हुनर: कला, कौशल। बेफिक्र: चिंतामुक्त। पैग़ाम: संदेश। बशर: मनुष्य, मानव जीवन।

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Zainab Khatoon
लेखक

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