इस्लाम में हलाला | कुरान और हदीस में हलाला, इस्लामी तलाक नियम

इस्लाम में हलाला की अवधारणा, इसके कुरान और हदीस में उल्लेख, इसके सही और गलत तरीके, और इसके नैतिक पहलुओं को समझें। यह विस्तृत गाइड हलाला की गंभीरता, तलाक के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य, और इसकी पूर्व-नियोजित प्रक्रिया के खिलाफ चेतावनी पर प्रकाश डालता है।

Islamic
Islamic Verified Local Voice • 30 May, 2025 पत्रकार
July 28, 2024 • 1:52 PM | फखरपुर  756  0
Last Edited By: Furkan S Khan (7 months ago)
कुरान और हदीस
NEWS CARD
Logo
इस्लाम में हलाला | कुरान और हदीस में हलाला, इस्लामी तलाक नियम
“इस्लाम में हलाला | कुरान और हदीस में हलाला, इस्लामी तलाक नियम”
Favicon
Read more on vews.in
28 Jul 2024
https://www.vews.in/halala-in-islam-halala-in-quran-and-hadith
Copied

इस्लाम में हलाला एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद विषय है, जिसे समझना जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जा सके। हलाला का जिक्र कुरान और हदीस में मिलता है, और इसका मकसद तलाक के मसले को गंभीरता से लेना है ताकि इसका दुरुपयोग न हो। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

हलाला का अर्थ और उसका कारण

हलाला एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला को अपने पहले पति के लिए फिर से हलाल (वैध) होने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति से शादी करनी पड़ती है और उसके बाद तलाक लेना पड़ता है। यह तब आवश्यक होता है जब किसी पति ने अपनी पत्नी को तीन बार तलाक दे दिया हो। तीन तलाक के बाद, वह पत्नी उस पति के लिए हराम (अवैध) हो जाती है और केवल हलाला के बाद ही वह पुनः वैध हो सकती है।

history This is an archived post. The information provided may be outdated.

Frequently Asked Questions 6

नहीं। कुरान ने केवल कानूनी ढाँचा बताया है कि तीसरी बार तलाक के पश्चात पुनर्मिलन तभी संभव है जब बीच में वैध विवाह पूरा हुआ हो। कुरान किसी धोखाधड़ी या नाटकीय टेम्पररी विवाह को बढ़ावा नहीं देती। (सूरह अल-बकरह 2:230)

हाँ। कई हदीसों और बाद के फतवों में ‘तहलिल’ (अर्थात सिर्फ पहले पति के लिए हलाल करने हेतु आयोजित विवाह) को हराम बताया गया है। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने ऐसे व्यक्तियों को “मुक़त-ए-हलाला” कहा और इसे शापित कर्म बताया। (सुन्नन इब्न माज़ा, किताब अन-निकाह)

अगर तलाक तीसरी बार हुआ है, तो नहीं। पहले वह किसी और से वैध विवाह करे और वह रिश्ता वास्तविक रूप से समाप्त हो जाए (तलाक या मृत्यु के कारण), तब पहले पति से निकाह वैध होता है। यह कुरान का नियम है, न कि ‘हलाला’ नाम की कोई प्रथा।

दुर्भाग्य से हाँ। कुछ समाजों में लोग इसे व्यवसाय या सामाजिक दबाव के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है। अधिकांश इस्लामी विद्वानों ने ऐसे “प्री-अरेंज्ड हलाला” को पाप और हराम बताया है।

इस्लाम परिवार की स्थिरता और सम्मान को प्राथमिकता देता है। तलाक अंतिम विकल्प है और ‘हलाला’ नाम की कोई रीत धर्म ने नहीं बनाई, बल्कि यह केवल उस स्थिति की व्याख्या है जब विवाह तीन बार टूट चुका हो।

नियोग प्रथा प्राचीन भारतीय सामाजिक रीत थी जिसमें वंश वृद्धि के लिए अन्य पुरुष से संबंध स्थापित किया जाता था। इसके विपरीत, इस्लाम में ऐसा कोई सामाजिक अनुबंध नहीं है — केवल वैध विवाह के भीतर ही किसी भी संबंध की अनुमति है।

Islamic Verified Local Voice • 30 May, 2025 पत्रकार

Explore the latest news and insights on Islam with our dedicated platform. From current events to deep dives into Islamic teachings and history, we provide a comprehensive source of information to enrich your understanding of this diverse and influential faith.

amp_stories Web Stories
login Login
local_fire_department Trending menu Menu
Logo

Never miss what matters

Enable notifications to get exclusive updates and top news stories.

⚙️ Manage Notifications

You are currently receiving our latest breaking news and updates.

Manage Notifications