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Vews मुस्लिम समाचार हिन्दी: Moharram 2022: क्या मोहर्रम में ढोल बजाना जायज है?

आज यानी 9 अगस्त 2022 को Moharram 2022 खत्म हो रहा है, मोहर्रम आते ही सोशल मीडिया पर एक नए बहस शुरू हो जाती की क्या "क्या मोहर्रम में ढोल बजाना जायज है"?

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1. Moharram 2022क्या मोहर्रम में ढोल बजाना जायज है

इस्लाम में मोहर्रम का महीना बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है 1 मोहर्रम इस्लामिक नया साल (Islamic New Year) भी होता है और 1 मोहर्रम के दिन इस्लाम के तीसरे खलीफा हजरत उमर इब्न खत्ताब (Umar Ibn Khattab) रदी अल्लाहु अन्हु  (May Allah be pleased with him) की शहादत का भी दिन माना जाता है.

2. इस्लाम में मोहर्रम का महीना बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है

इस्लाम में मोहर्रम एक ऐसा महीना है जिसमें तमाम अम्बिया इकराम और नबियों की दुआएं कुबूल हुई, और इसी महीने में हजरत इमाम हुसैन रदी अल्लाहु अन्हु  (Hazrat Imam Husain May Allah be pleased with him) की शहादत का भी दिन माना जाता है,

3. क्या मोहर्रम में ढोल बजाना जायज है या नहीं

क्या मोहर्रम में ढोल बजाना जायज है या नहीं
Photo From Google

मोहर्रम में ढोल बजाना बिलकुल हराम है 

रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:- 

"अल्लाह ने मुझ पर शराब , जुआ और ढोल को हराम कर दिया है"

(सुनन अबू दाऊद हदीस न .3696)

4. जाने मोहर्रम से जुड़ी बातें रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया

हुज़ूर (ﷺ) ने फ़रमायाः

"मैं अल्लाह से उम्मीद करता हूँ कि यौम-ए-आशूरा का रोज़ा पिछले साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाएगा"

(मुस्लिम 1162)

5. आशुरा के दिन अपने घर वालों के ख़र्च में क़ुशादगी

हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-

“जो शख़्स आशुरा के दिन अपने घर वालों के ख़र्च में क़ुशादगी एख़्तियार करे तो अल्लाह ताला सारे साल उसके माल व ज़र में क़ुशादगी अता फ़रमाएगा, हज़रत सुफ़यान कहते है की हमने इसका तजुर्बा किया तो ऐसा ही पाया”

(Shuab-Ul-Iman 3512)

6. हसन और हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा मरतबा

इब्ने उमर रजि. फरमाते है मैंने अल्लाह के रसूल ﷺ को फरमाते हुए सुना =हसन और हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा ये दोनों मेरी दुनिया के फूल हैं 

(जामे तिर्मिज़ी हदीस न .3770)

7. हक़ीक़त यह है कि अल्लाह लोगों पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता

हक़ीक़त यह है कि अल्लाह लोगों पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता
Photo Tweet By: @Muhammad4peace1

अल्लाह तआला फ़रमाता है:

हक़ीक़त यह है कि अल्लाह लोगों पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता, लेकिन इनसान हैं जो ख़ुद अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं।

(सूरह यूनुस आयत न. 44)

8. रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े अल्लाह के महीने ‘मुहर्रम के

हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:

“रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े अल्लाह के महीने ‘मुहर्रम’ के है और फ़र्ज़ नमाज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ रात की नमाज़ है” 

(मुस्लिम 2755)

9. वाक़िया कर्बला और सीरत-ए-सहाबा का ज़िक्र

वाक़िया कर्बला और सीरत-ए-सहाबा का ज़िक्र तो हर कोई करता है। असल बात तो ये है कि हम सबक़ हासिल करें और अपने आमाल की दरूस्तगी करें। अल्लाह हमें इसकी तौफ़ीक़ दे

10. Moharram 2022: क्या मोहर्रम में ढोल बजाना जायज है

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