शायरी खूबसूरत नज़्म: नबी का ज़िक्र मेरि ज़िन्दगी में रहता है

ख़याले तैबा मेरि आशिक़ी में रहता है नबी का ज़िक्र मेरि ज़िन्दगी में रहता है

शायरी खूबसूरत नज़्म:  नबी का ज़िक्र मेरि ज़िन्दगी में रहता है
Madina Munawwara

~ | नात शरीफ | ~

ख़याले तैबा  मेरि आशिक़ी  में रहता है 

नबी का ज़िक्र मेरि ज़िन्दगी में रहता है 

خیال طیبہ مری عاشقی میں رہتا ہے 

نبی کا ذکر  مری زندگی  میں رہتا ہے 

 कभी बुलाएंगे सरकारे मदीना मुझको

 दिलो दिमाग़ मेरा इस खुशी में रहता है

کبھی  بلائیں گے سرکار مدینہ مجھ کو 

دل و دماغ مرا اس خوشی میں رہتا ہے 

 उसे तो कोई भी गुमराह कर नहीं सकता

 मेरे  हुज़ूर  की   जो  रहबरी  में  रहता  है

اسے تو کوئی بھی گمراہ کر نہیں سکتا 

مرے حضور کی جو رہبری میں رہتا ہے 

 मुझे  ज़माने से  मतलब  नहीं  रहा यारो

 मेरा  दिमाग  तो  नाते  नबी  में  रहता है

مجھے زمانے سے مطلب نہیں رہا یارو 

مرا دماغ  تو  نعت  نبی  میں  رہتا ہے 

 बचा ना पायेगा उस को कोई जहन्नम से

 रसूले पाक  की जो  दुश्मनी  में  रहता है

بچا  نہ  پائے  گا اس  کوئی  جہنم  سے 

رسول پاک کی جو دشمنی میں رہتا ہے 

 उसी  के  वास्ते  रब ने  बनाई  है जन्नत

 मेरे  हुज़ूर   की  जो  दोस्ती  में  रहता है

اسی کے واسطے  رب نے  بنائی  ہے جنّت 

مرے حضور کی جو دوستی میں رہتا ہے 

 हयाओ  शर्म  उसे आती ही नहीं अकरम

 जो शख़्स शामो सहर मयकशी में रहताहै

حیا  و   شرم   اسے   آتی   ہی   نہیں   اکرم 

جو شخص شام و سحر میکشی میں رہتاہے 

सोर्स- अनजान

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