छिपकिली मारने के लिए मोहम्मद ﷺ ने क्यों कहा?

इस लेख में हम छिपकिली के हानिकारक होने के इस्लामी दृष्टिकोण और वैज्ञानिक तथ्यों पर चर्चा करेंगे। यह लेख यह समझने में मदद करेगा कि क्या वास्तव में छिपकिली इंसानों के लिए हानिकारक है और इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डालेगा।

Islamic
Islamic Verified Local Voice • 30 May, 2025 पत्रकार
अगस्त 22, 2024 • 10:39 PM | सऊदी अरबिया  176  0
V
Vews News
BREAKING
Islamic
2 सालों पहले
छिपकिली मारने के लिए मोहम्मद ﷺ ने क्यों कहा?
इस लेख में हम छिपकिली के हानिकारक होने के इस्लामी दृष्टिकोण और वैज्ञानिक तथ्यों पर चर्चा करेंगे। यह लेख यह समझने में मदद करेगा कि क्या वास्तव में छिपकिली इंसानों के लिए हानिकारक है और इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डालेगा।
Full Story: https://vews.in/trending/dharm/why-are-we-asked-to-kill-lizards-in-islam
https://vews.in/trending/dharm/why-are-we-asked-to-kill-lizards-in-islam
कॉपी हो गया
छिपकिली मारने के लिए मोहम्मद ﷺ ने क्यों कहा?
Why are we asked to kill lizards in Islam?

छिपकिली को मारने का कारण और इस्लामी दृष्टिकोण

इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो अपने अनुयायियों को सभी जीवित प्राणियों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की शिक्षा देता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में, इस्लाम कुछ प्राणियों को मारने की अनुमति देता है। इसी संदर्भ में, छिपकिली के बारे में भी एक हदीस में उल्लेख किया गया है, जहाँ छिपकिली को मारने की सलाह दी गई है।

हदीस का संदर्भ

छिपकिली को मारने से संबंधित हदीस सहीह मुस्लिम में वर्णित है। यह हदीस इस प्रकार है:

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो कोई छिपकिली को पहले वार में मारे, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाएँगी, और दूसरे वार में मारने वाले के लिए कम नेकियाँ होंगी, और तीसरे वार में मारने वाले के लिए उससे भी कम।" (सहीह मुस्लिम, हदीस संख्या 2240)

इस हदीस का विश्लेषण

इस हदीस के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि छिपकिली को मारना एक अच्छे कार्य के रूप में माना गया है। इस हदीस में पहले वार में छिपकिली को मारने वाले के लिए विशेष रूप से सौ नेकियों का उल्लेख किया गया है। यह इस बात का संकेत है कि छिपकिली को मारना इस्लामी दृष्टिकोण में एक पुण्य कार्य के रूप में देखा गया है।

छिपकिली को मारने का कारण

इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, छिपकिली एक हानिकारक जीव है, जो इंसानों के लिए बीमारी का कारण बन सकती है। इस्लाम में कुछ प्राणियों को इसलिए मारने की अनुमति दी गई है ताकि वे लोगों को नुकसान न पहुँचाएँ। इस हदीस के संदर्भ में, यह समझा जा सकता है कि छिपकिली को मारने का आदेश इसलिए दिया गया है क्योंकि यह हानिकारक हो सकती है और इससे बीमारियों के फैलने का खतरा हो सकता है।

इस्लामिक दृष्टिकोण से निष्कर्ष

इस्लामिक दृष्टिकोण में, छिपकिली को मारना एक आवश्यक कार्य माना गया है, खासकर जब वह इंसानों के लिए हानिकारक साबित हो। इस हदीस से यह भी स्पष्ट होता है कि इस्लाम ने स्वच्छता और स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण माना है और इसी कारण से हानिकारक जीवों को मारने की अनुमति दी गई है।

हालांकि, यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि इस्लाम सभी जीवों के प्रति दया और करुणा की शिक्षा देता है। इसलिए, छिपकिली को केवल तब मारना चाहिए जब वह सचमुच में हानिकारक साबित हो।

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि इस्लामी शिक्षाएं समय और परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार करने की सलाह देती हैं। इस हदीस में दी गई शिक्षा भी इसी संदर्भ में है कि हानिकारक प्राणियों से बचाव के लिए उन्हें मारा जा सकता है।

हदीस में छिपकिली को मारने की सलाह का एक प्रमुख कारण हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से जुड़ा हुआ है। इस्लामिक परंपराओं के अनुसार, जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को राजा नमरूद ने आग में फेंका था, तब अन्य सभी प्राणी आग को बुझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन छिपकिली (अरबी में "वज़ग") ने आग को और भड़काने के लिए फूँक मारी थी।

इसी घटना के कारण छिपकिली को एक नकारात्मक जीव माना गया और इसे मारने की सलाह दी गई। यह वाकया इस्लामिक साहित्य और हदीसों में उल्लेखित है और इसे एक प्रमुख कारण के रूप में देखा जाता है कि क्यों छिपकिली को मारने के लिए कहा गया है।

छिपकिली: हानिकारक जीव और इसके वैज्ञानिक तथ्यों पर चर्चा

छिपकिली एक सामान्य रूप से दिखाई देने वाला जीव है, जिसे अक्सर घरों और अन्य इमारतों में देखा जाता है। इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, छिपकिली को मारने की सलाह दी गई है क्योंकि इसे हानिकारक माना गया है। लेकिन क्या वास्तव में छिपकिली हानिकारक है? इस लेख में, हम इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए इस्लामी दृष्टिकोण के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों पर भी चर्चा करेंगे।

इस्लामी दृष्टिकोण

इस्लाम में छिपकिली को मारने के आदेश के पीछे का मुख्य कारण यह माना जाता है कि यह जीव हानिकारक हो सकता है और इससे बीमारी फैलने का खतरा होता है। जैसा कि हदीस में उल्लेख किया गया है, "जो कोई छिपकिली को पहले वार में मारे, उसके लिए सौ नेकियाँ लिखी जाएँगी..." (सहीह मुस्लिम, हदीस संख्या 2240)। यह बताता है कि छिपकिली को मारना एक अच्छे कार्य के रूप में देखा जाता है, खासकर जब यह हानिकारक हो।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, छिपकिली को आमतौर पर मनुष्यों के लिए सीधे तौर पर हानिकारक नहीं माना जाता है। वे कीड़ों, मक्खियों और अन्य छोटे जीवों को खाकर पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। हालांकि, कुछ मामलों में छिपकिली हानिकारक हो सकती है:

  • बीमारी का कारण: छिपकिली खुद बीमारियों का सीधा स्रोत नहीं होतीं, लेकिन इनके संपर्क में आने वाले खाद्य पदार्थ या अन्य चीजों से बीमारी का खतरा हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि छिपकिली किसी खाने के सामान पर चलती है या उसका मल उसमें गिरता है, तो वह दूषित हो सकता है और इसके कारण खाद्य जनित बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • सैल्मोनेला संक्रमण: कुछ छिपकलियों के शरीर में सैल्मोनेला बैक्टीरिया हो सकता है, जो कि मनुष्यों के लिए खतरनाक हो सकता है। हालांकि, यह संक्रमण छिपकिली के काटने या सीधे संपर्क में आने से नहीं, बल्कि दूषित सतहों के माध्यम से फैलता है।
  • घरों में समस्या: घरों में छिपकिली का अधिक होना एक चिंता का विषय हो सकता है, खासकर उनके मल के कारण, जो अस्वच्छता फैला सकता है। उनके मल में हानिकारक बैक्टीरिया और परजीवी हो सकते हैं।

छिपकिली के लाभ

हालांकि छिपकिली को हानिकारक माना जा सकता है, लेकिन वे कई प्रकार के लाभ भी प्रदान करती हैं:

  • कीट नियंत्रण: छिपकिली मक्खियाँ, मच्छर, और अन्य कीड़े खाती हैं, जो कि इंसानों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इस प्रकार, वे एक प्राकृतिक कीट नियंत्रण के रूप में काम करती हैं।
  • पर्यावरणीय संतुलन: छिपकिली पर्यावरणीय खाद्य श्रृंखला का हिस्सा हैं, और वे छोटे कीड़ों को खाकर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायता करती हैं।

निष्कर्ष

छिपकिली के हानिकारक या लाभदायक होने पर विचार करते समय यह स्पष्ट होता है कि इस्लामिक दृष्टिकोण में उन्हें हानिकारक माना गया है, खासकर जब वे स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, छिपकिली सामान्यतः हानिकारक नहीं होती, लेकिन कुछ स्थितियों में यह बीमारियों का माध्यम बन सकती है। इसीलिए, जहां एक ओर हमें इन जीवों से सावधानी बरतनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर उनके पर्यावरणीय लाभों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

Islamic Verified Local Voice • 30 May, 2025 पत्रकार

Explore the latest news and insights on Islam with our dedicated platform. From current events to deep dives into Islamic teachings and history, we provide a comprehensive source of information to enrich your understanding of this diverse and influential faith.

खास आप के लिए

बहराइच हिंसा: बहराइच में दंगाइयों ने मुस्लिमों को भारी नुकसान पहुंचाया, बकरियां और सामान लूटे | पढ़ें The Wire की रिपोर्ट
बहराइच हिंसा: बहराइच में दंगाइयों ने मुस्लिमों को भारी नुकसान पहुंचाया, बकरियां और सामान लूटे | पढ़ें The Wire की रिपोर्ट
मौलाना सरवर क़ासमी का दौरा: दंगा प्रभावित इलाकों में जाकर पीड़ितों की मदद की।
मौलाना सरवर क़ासमी का दौरा: दंगा प्रभावित इलाकों में जाकर पीड़ितों की मदद की।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मदरसों को बंद करने की NCPCR सिफारिश पर रोक लगाई
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मदरसों को बंद करने की NCPCR सिफारिश पर रोक लगाई
बहराइच में संप्रदायिक हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग: मौलाना मोहम्मद सरवर क़ासमी ने सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा मेमोरेंडम
बहराइच में संप्रदायिक हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग: मौलाना मोहम्मद सरवर क़ासमी ने सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा मेमोरेंडम
फखरपुर न्यूज पोस्ट कार्ड: देश दुनिया की तमाम हैडलाइन
फखरपुर न्यूज पोस्ट कार्ड: देश दुनिया की तमाम हैडलाइन
शुक्रिया सैयद महफ़ूज़ुर रहमान फ़ैज़ी एडवोकेट: बहराइच हिंसा में बुलडोजर एक्शन पर हाईकोर्ट की रोक: 15 दिन की मोहलत
शुक्रिया सैयद महफ़ूज़ुर रहमान फ़ैज़ी एडवोकेट: बहराइच हिंसा में बुलडोजर एक्शन पर हाईकोर्ट की रोक: 15 दिन की मोहलत

बेहतर अनुभव के लिए यह वेबसाइट कुकीज़ का उपयोग करती है। ब्राउज़िंग जारी रखकर आप हमारी कुकीज़ नीति से सहमत होते हैं। अधिक जानें

notifications
महत्वपूर्ण अपडेट्स कभी मिस न करें

विशेष अपडेट और प्रमुख समाचार प्राप्त करने के लिए नोटिफिकेशन चालू करें।

amp_stories वेब स्टोरीज़
login लॉगिन करें
local_fire_department ट्रेंडिंग स्टोरी menu मेनू