तू जो पास हो तो हर शाम सुहानी लगती है, तेरी बातें भी मुझे जैसे कहानी लगती है।
तेरी आँखों में उतर जाए अगर चाँद कोई, रौशनी की भी कसम, कुछ पुरानी लगती है।
मैं जो लिखने बैठूँ तुझ पर कोई नज़्म ए-जाना, हर दफा इक नई महक की रवानी लगती है।
तेरी हँसी में बसी है कोई जादू सा यारब, धड़कनों की भी सदा अब दिवानी लगती है।
जो भी लफ्ज़ लिखूं, तेरा नाम आ जाता है, मोहब्बत की ये ज़िद भी बेइमानी लगती है।