अखिलेश, ओवैसी से गठबंधन क्यों करें ?

ओवैसी कबूल क्यों नहीं ? इतनी बड़ी पार्टी के लिए अखिलेश यादव के पास कोई स्थान आखिर क्यूँ नहीं है

अखिलेश, ओवैसी से गठबंधन क्यों करें ?
अखिलेश, ओवैसी से गठबंधन क्यों करें ?

अखिलेश, ओवैसी से गठबंधन क्यों करें ?

अखिलेश यादव ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ राजनितिक गठबंधन से साफ मना कर दिया है। मुसलमानों में इस को लेकर नाराजगी है कि जब सपा सुप्रीमो तमाम छोटी पार्टियों से गठबंधन करने पर अमादा हैं तो फिर ओवैसी की पार्टी से गठबंधन करने से क्यों कतरा रहे हैं?

 

पहली नजर में देखा जाए तो सपा सुप्रीमों पर गुस्सा तो आता है मगर राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सपा सुप्रीमों का ये निर्णय राजनीतिक चालाकी और सियासी ख़ुद गरज़ी का जीता जागता उदाहरण है।

 

आप सोच रहे होंगे ये कैसी चालाकी है जिसमें एक पार्टी ‘महान दल’ जिसकी जमीनी हैसियत कुछ नहीं। जितनी उसकी उम्र है उससे ज्यादा ओवैसी के पार्टी के पास देश के अलग अलग राज्यों से सासंद व विधायक हैं।

 

इतनी बड़ी पार्टी के लिए अखिलेश यादव के पास कोई स्थान आखिर क्यूँ नहीं है। आइए इसे आंकड़ों के जरिए समझने की कोशिश करते हैं। ताकि सपा सुप्रीमो के सियासी दांव पेंच से आप भी वाकिफ हो सकें।

 

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि

 

उत्तर प्रदेश में पचहत्तर (75) जिले है जिन में अस्सी (80) संसदीय और चार सौ तीन (403) विधानसभा क्षेत्र हैं। राजनीतिक समझ रखने वाले लोग अच्छे से जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति जात पात और मजहब के इर्द-गिर्द घूमती है इस लिए पहले यूपी का राजनीतिक गणित समझ लें।

 

Get in touch with other sites