गांव की गलियों में चारों ओर बैनर और पोस्टर की भरमार हो गई है। ऐसा लग रहा है मानो खुद देवता धरती पर उतर आए हों। हर मोड़ पर समाजसेवा की महिमा का बखान हो रहा है, और हर उम्मीदवार अपनी-अपनी अच्छाइयों का गाना गा रहा है।
सुरेश खान, जो पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर थे, कहते हैं, "इस बार मैं अपने नए 'फ्री वाई-फाई' प्लान के साथ आया हूं। गांव के हर कोने में वाई-फाई लगेगा। अब कोई बच्चा ऑनलाइन क्लास मिस नहीं करेगा, और हां, टिकटॉक स्टार बनने का सपना भी पूरा होगा!"
इधर रामेश्वर अंसारी, जो अपनी 'फ्री मोबाइल चार्जिंग स्टेशन' योजना के साथ आए हैं, कहते हैं, "हमारे गांव में बिजली की समस्या है। मैंने सोचा क्यों न सबके लिए फ्री चार्जिंग स्टेशन खोल दूं। अब सब आराम से अपने मोबाइल चार्ज कर सकेंगे।"
सबसे मजेदार बात यह है कि चुनाव के दौरान सभी उम्मीदवार गांववालों के सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मानो धरती निगल जाती है या आसमान खा जाता है। पिछले बार के चुनाव विजेता, पंडित जी, ने चुनाव के समय सैकड़ों वादे किए थे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनका दर्शन तभी होता है जब गांव का कोई बड़ा पर्व या त्यौहार हो।
इस बार चुनाव के चलते गांव में माहौल कुछ ऐसा है कि हर घर में एक उम्मीदवार का पोस्टर जरूर दिखता है। यहां तक कि बच्चों की किताबों पर भी चुनावी स्टिकर लगे हुए हैं। "पापा, मुझे ये पोस्टर क्यों दिए हैं?" छोटे राहुल ने पूछा। "बेटा, इस बार चुनाव में पोस्टर चिपकाने का काम मिल गया है," पापा ने हंसते हुए जवाब दिया।
गांव की महिलाएं भी इस बार पीछे नहीं हैं। "हमने तो घर के बाहर दीवार पर उम्मीदवारों के नाम लिख दिए हैं," साजिया देवी बताती हैं। "कम से कम हर बार सबको याद दिलाते रहेंगे कि किसने क्या वादा किया था।"
देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कितने प्रधान जीतते हैं और गांववालों के वादों का क्या होता है। फिलहाल, गांव में चुनावी रंगारंग माहौल का लुत्फ उठाया जा रहा है।
लेकिन एक बात तय है, फखरपुर गांव के लोग इस बार किसी भी उम्मीदवार को यूं ही जाने नहीं देंगे। "इस बार हमने तय कर लिया है, चुनाव बाद हम अपने प्रधान से वादों का हिसाब जरूर लेंगे," एक बुजुर्ग ने गंभीर मुद्रा में कहा।
आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस चुनावी महासंग्राम का अंत किस तरह होता है। फिलहाल, फखरपुर गांव में चुनावी रंग जमकर बिखरा हुआ है और लोग इस राजनीतिक नाटक का जमकर मजा ले रहे हैं।
"संदेश: यह लेख केवल हंसी और मजाक के लिए है। वे लोग जो चुनावों के समय बरसाती मेढ़क की तरह निकलते हैं, बाकी समय मिलने पर भी गायब रहते हैं। आपके जानकारी के लिए, यह वाक्य केवल एक हंसी का माध्यम है और किसी व्यक्ति या समूह को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं है।"
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