नया सवेरा
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: देखो, बढ़ो, चुनो, सीखो, रखो
Radeef: तुम
रात की काली चादर हटी, नया सवेरा देखो तुम
आँखों में उम्मीदें लिए, सपनों को अब देखो तुम
आलस की बेड़ी तोड़ो, उठो और आगे बढ़ो तुम
हर मुश्किल से लड़ जाओ, अपनी राह चुनो तुम
जीवन एक संघर्ष है, हर पल कुछ नया सीखो तुम
गिरो तो फिर से उठो, अपनी मंज़िल को देखो तुम
हिम्मत न हारो कभी, खुद पे यक़ीं रखो तुम
हर ख़्वाब को हक़ीक़त में, बदलने का दम रखो तुम
आँखों में उम्मीदें लिए, सपनों को अब देखो तुम
आलस की बेड़ी तोड़ो, उठो और आगे बढ़ो तुम
हर मुश्किल से लड़ जाओ, अपनी राह चुनो तुम
जीवन एक संघर्ष है, हर पल कुछ नया सीखो तुम
गिरो तो फिर से उठो, अपनी मंज़िल को देखो तुम
हिम्मत न हारो कभी, खुद पे यक़ीं रखो तुम
हर ख़्वाब को हक़ीक़त में, बदलने का दम रखो तुम
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: बढ़ता, लड़ता, बनाता, चलता, बदलता, भूलता, रखता
Radeef: चल
समय का चक्र है चलता, तू भी आगे बढ़ता चल
हर मुश्किल से लड़ता चल, अपनी राह बनाता चल
न डर किसी तूफ़ाँ से, बस अपनी धुन में चलता चल
जो सोचा है तूने, उसे हक़ीक़त में बदलता चल
न देख पीछे मुड़कर, बस आगे बढ़ता चल
हर पल को जी ले ख़ुशी से, हर ग़म को भूलता चल
तेरी मंज़िल है तेरी ही, बस उस पर निगाह रखता चल
हर सुबह एक नया अवसर, उसे तू अपना बनाता चल
हर मुश्किल से लड़ता चल, अपनी राह बनाता चल
न डर किसी तूफ़ाँ से, बस अपनी धुन में चलता चल
जो सोचा है तूने, उसे हक़ीक़त में बदलता चल
न देख पीछे मुड़कर, बस आगे बढ़ता चल
हर पल को जी ले ख़ुशी से, हर ग़म को भूलता चल
तेरी मंज़िल है तेरी ही, बस उस पर निगाह रखता चल
हर सुबह एक नया अवसर, उसे तू अपना बनाता चल