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हम और ज़िंदगी
जीवन की पुकार: Furkan S Khan की प्रेरणादायक हिन्दी नज़्म
Furkan S Khan द्वारा रचित जीवन पर एक सुंदर हिन्दी नज़्म। इस कविता में जीवन के उतार-चढ़ाव और अनवरत यात्रा का वर्णन है।
Sunday, August 23, 2026
https://vews.in/जीवन-की-पुकार
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हम और ज़िंदगी
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“जीवन की पुकार: Furkan S Khan की प्रेरणादायक हिन्दी नज़्म”
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https://vews.in/जीवन-की-पुकार
Date
23 August 2026
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https://vews.in/जीवन-की-पुकार
"
Nazm By Furkan S Khan
यह जीवन एक सफ़र है, हर पल की अपनी पुकार है
कभी ख़ुशी, कभी गम, हर मौसम की बहार है
हर साँस में जीवन का, यही तो इक़रार है
यह दुनिया फूलों का, एक सुंदर गुलज़ार है
उम्मीदों पर टिकी, हर राह का आधार है
बस जीते जाओ, यही इस दिल का सार है
हर मुश्किल में छिपा, एक नया ही निखार है
यह ज़िंदगी है दोस्त, एक अद्भुत उपहार है।
Kaafiya: पुकार, बहार, इक़रार, गुलज़ार, आधार, सार, निखार, उपहार
Radeef: है
"
Nazm By Furkan S Khan
यह साँस जो चल रही, यही तो है ज़िंदगी
हर लम्हे में छुपी, कोई नई बंदगी है
सुबह की पहली किरण, एक नई ताजगी है
शाम की ढलती रौशनी, उसमें भी सादगी है
बचपन की भोली भाली, वो प्यारी सी हँसी है
जवानी की उमंग में, एक नई रोशनी है
बुढ़ापे की ख़ामोशी में, तजुर्बों की रोशनी है
हर पल को जीना है, यही तो इसकी मर्जी है।
Kaafiya: ज़िंदगी, बंदगी, ताजगी, सादगी, हँसी, रोशनी, मर्जी
Radeef: है
जीवन की पुकार
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: पुकार, बहार, इक़रार, गुलज़ार, आधार, सार, निखार, उपहार
Radeef: है
यह जीवन एक सफ़र है, हर पल की अपनी पुकार है
कभी ख़ुशी, कभी गम, हर मौसम की बहार है
हर साँस में जीवन का, यही तो इक़रार है
यह दुनिया फूलों का, एक सुंदर गुलज़ार है
उम्मीदों पर टिकी, हर राह का आधार है
बस जीते जाओ, यही इस दिल का सार है
हर मुश्किल में छिपा, एक नया ही निखार है
यह ज़िंदगी है दोस्त, एक अद्भुत उपहार है।
कभी ख़ुशी, कभी गम, हर मौसम की बहार है
हर साँस में जीवन का, यही तो इक़रार है
यह दुनिया फूलों का, एक सुंदर गुलज़ार है
उम्मीदों पर टिकी, हर राह का आधार है
बस जीते जाओ, यही इस दिल का सार है
हर मुश्किल में छिपा, एक नया ही निखार है
यह ज़िंदगी है दोस्त, एक अद्भुत उपहार है।
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: ज़िंदगी, बंदगी, ताजगी, सादगी, हँसी, रोशनी, मर्जी
Radeef: है
यह साँस जो चल रही, यही तो है ज़िंदगी
हर लम्हे में छुपी, कोई नई बंदगी है
सुबह की पहली किरण, एक नई ताजगी है
शाम की ढलती रौशनी, उसमें भी सादगी है
बचपन की भोली भाली, वो प्यारी सी हँसी है
जवानी की उमंग में, एक नई रोशनी है
बुढ़ापे की ख़ामोशी में, तजुर्बों की रोशनी है
हर पल को जीना है, यही तो इसकी मर्जी है।
हर लम्हे में छुपी, कोई नई बंदगी है
सुबह की पहली किरण, एक नई ताजगी है
शाम की ढलती रौशनी, उसमें भी सादगी है
बचपन की भोली भाली, वो प्यारी सी हँसी है
जवानी की उमंग में, एक नई रोशनी है
बुढ़ापे की ख़ामोशी में, तजुर्बों की रोशनी है
हर पल को जीना है, यही तो इसकी मर्जी है।
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