अकेलेपन की आह

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: सताना, बताना, ठिकाना, बहाना  |  Radeef: है
रात भर जागना, दिल को सताना है, किसको ये दर्द अपना बताना है। हर ख़ुशी दूर हुई, गम का ठिकाना है, अब तो बस आँसुओं को बहाना है।

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: मातम, मौसम, आलम, सितम  |  Radeef: क्या करें हम?
लबों पे हँसी, मगर दिल में है मातम, क्या करें हम? कोई समझे न इस दर्द का मौसम, क्या करें हम? अश्कों में ढली हर रात का आलम, क्या करें हम? बस चुपचाप सहते हैं ये सारे सितम, क्या करें हम?

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: सारे, अँधेरे, घेरे, मेरे
जब से टूटे हैं ख़्वाब सारे, दिल में बस गए हैं अँधेरे। रोशनी की किरणें भी अब नहीं घेरे, बस उदासी के साये हैं मेरे।