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ग़म की आहट: Furkan S Khan की दर्द भरी ग़ज़ल
Furkan S Khan द्वारा लिखी गई ग़म और उदासी पर एक मार्मिक ग़ज़ल। यह ग़ज़ल जुदाई के दर्द और यादों की गहराई को बयां करती है।
Sunday, September 13, 2026
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“ग़म की आहट: Furkan S Khan की दर्द भरी ग़ज़ल”
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Date
13 September 2026
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/gham-ki-aahat-furkan-s-khan-sad-ghazal
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी यादों का एक सैलाब है उमड़ता आँखों में,
हर ख़्वाब मेरा डूब रहा है बहता साँसों में।
हर पल तेरी जुदाई का ये कैसा अफ़साना है,
ज़िन्दगी ख़्वाब बन गयी है, बस हसरतों के निशानों में।
जो हँसी कभी थी मेरे लबों पर, वो खो गयी,
अब तो बस आँसू ही हैं, इन सूनी राहों में।
ये कैसी बेरुख़ी है तेरी, के दूर हो गए,
हम तो भटक गए हैं, तेरी यादों के धागों में।
Kaafiya: आँखों, साँसों
Radeef: में
Ghazal — By Furkan S Khan
मेरे दिल पर ग़म के बादल घनेरा छाए हैं,
हर लम्हा तेरी याद के तूफ़ान मुझमें आए हैं।
कब तक यूँ तन्हाई में रातें गुज़ारूँगा,
जब तेरे बिन जीने के रास्ते ही मिटाए हैं।
ये कैसा इम्तिहान है मेरे इश्क़ का,
हर पल रुसवाई के साये मुझमें आए हैं।
जबसे तूने छोड़ा है, चैन कहाँ मुझको,
हर पल तेरी चाहत के अश्क मुझमें आए हैं।
Kaafiya: छाए, आए
Radeef: हैं
सैलाब: बाढ़ ख़्वाब: सपना हसरतें: इच्छाएं, चाहतें लबों: होंठ बेरुख़ी: उदासीनता, अनदेखी धागों: सूत्रों, रेशों
घनेरा: गहरा लम्हा: पल तन्हाई: अकेलापन रुसवाई: बदनामी, अपमान इम्तिहान: परीक्षा अश्क: आँसू
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