Key Highlights

  • जाने-माने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को करीब 6 महीने की हिरासत के बाद रिहा किया जाएगा।
  • उनके खिलाफ लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटा लिया गया है, जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था, जिसके बाद यह फैसला आया है।

लद्दाख में पर्यावरण और क्षेत्र के जनजातीय अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाने वाले प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को आखिरकार लगभग 6 महीने की हिरासत के बाद रिहा किया जाएगा। उनके खिलाफ लगाया गया विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटा लिया गया है, जिससे उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

लंबे संघर्ष के बाद राहत की खबर

सोनम वांगचुक को इस साल मार्च में हिरासत में लिया गया था, जब वे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा देने की मांग को लेकर 21 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी मुख्य मांगों में लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय जनजातीय संस्कृति की रक्षा करना शामिल था। उनकी भूख हड़ताल और उसके बाद की हिरासत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था।

वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जो सरकार को बिना किसी औपचारिक आरोप के व्यक्तियों को हिरासत में रखने की अनुमति देता है। इस कदम की कई मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज के सदस्यों ने कड़ी आलोचना की थी।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सरकार का रुख

वांगचुक की पत्नी, रिंचन ल्हामो ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य पर भी चिंता जताई गई थी, क्योंकि उन्होंने अपनी भूख हड़ताल के दौरान काफी वजन कम कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन से वांगचुक की हिरासत को लेकर जवाब मांगा था।

न्यायालय ने यह भी पूछा था कि क्या वांगचुक को हिरासत में रखने के लिए किसी ठोस आधार का इस्तेमाल किया गया था और क्या उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद, सरकार ने NSA हटाने और वांगचुक को रिहा करने का फैसला किया है। इस पूरी प्रक्रिया में, कई बार तथ्यों और दावों के बीच सच्चाई की परतें खोजना जटिल हो जाता है। ऐसे में, विश्वसनीय जानकारी का महत्व और बढ़ जाता है, जैसा कि अतीत में फखरपुर हादसे से जुड़े भ्रामक दावों के फैक्ट चेक में भी सामने आया था।

लद्दाख के भविष्य की लड़ाई

सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए छठी अनुसूची के दर्जे के प्रमुख पैरोकार रहे हैं। उनका मानना है कि यह विशेष दर्जा क्षेत्र की अद्वितीय संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आवश्यक है, जो जलवायु परिवर्तन और तीव्र विकास के दबाव में है। उनकी रिहाई को लद्दाख के अधिकारों के लिए चल रहे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

उनकी भूख हड़ताल और हिरासत ने लद्दाख के लोगों के बीच एकजुटता को मजबूत किया था, जिन्होंने अपने पर्यावरण और पहचान को बचाने के लिए उनकी अपील का समर्थन किया था। अब जब वे रिहा हो रहे हैं, तो उम्मीद है कि वे लद्दाख के भविष्य के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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