यह शायरी साहस और दृढ़ संकल्प पर केंद्रित है। यह हमें सिखाती है कि डर का सामना करना और मुश्किलों से न घबराना चाहिए। ठोकर खाकर भी उठ खड़े होने वाले ही सच्चे वीर होते हैं।