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साहस की इंतज़ार शायरी: डर पर विजय पाएं

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई यह इंतज़ार शायरी साहस और हिम्मत की मिसाल है। डर को हराकर मुश्किलों का सामना करने की प्रेरणा पाएं।

Thursday, September 24, 2026
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साहस की इंतज़ार शायरी: डर पर विजय पाएं
“साहस की इंतज़ार शायरी: डर पर विजय पाएं”
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24 September 2026
साहस की इंतज़ार शायरी: डर पर विजय पाएं
इंतज़ार शायरी
डर को पीछे छोड़, हिम्मत को जगाएँ हर मुश्किल से लड़ने, कदम बढ़ाएँ अंधेरों से घबराकर, न यूँ छिप जाएँ आँधी तूफानों में भी, राहें पाएँ ज़िंदगी की राहों में, जो ठोकर खाएँ वही वीर कहलाएँ, जो फिर उठ जाएँ
Kaafiya बढ़ाएँ, पाएँ Radeef जाएँ
F Poetry ByFurkan S Khan

यह शायरी साहस और दृढ़ संकल्प पर केंद्रित है। यह हमें सिखाती है कि डर का सामना करना और मुश्किलों से न घबराना चाहिए। ठोकर खाकर भी उठ खड़े होने वाले ही सच्चे वीर होते हैं।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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