गम की परछाई

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: सताती, चुराती, रुलाती, जाती, आती, छा जाती  |  Radeef: है
ये गम की परछाई मुझको सताती है मेरी हर खुशी को मुझसे चुराती है अकेलेपन की आहटें दिल को रुलाती है ये रातें बेकरारी में कटती जाती है कोई उम्मीद अब नज़र नहीं आती है बस एक खामोशी हर तरफ छा जाती है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: सफर, खबर, पहर, असर, घर, मंज़र  |  Radeef: है
ये टूटे ख्वाबों का लंबा सफर है न कोई मंज़िल, न कोई खबर है हर लम्हा उदासी का गहरा पहर है दिल पर हर बात का ज़हरीला असर है ये ज़िंदगी बस एक खाली घर है जहाँ सिर्फ खामोशी का मंज़र है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: दिल, मंज़िल, मुश्किल, साहिल, काबिल, हासिल  |  Radeef: है
ये कैसा अंधेरा है मेरे दिल में न कोई रौशनी, न कोई मंज़िल है हर राह पर खड़ी बस मुश्किल है न कोई किनारा, न कोई साहिल है खुशियों के काबिल न रहा ये दिल है गम के सिवा कुछ भी न हासिल है।