मोहब्बत का नग़मा: एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल
Furkan S Khan की लिखी हुई मोहब्बत पर एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल, जिसमें इश्क़ के एहसास को बख़ूबी बयां किया गया है।
लबों पे तेरे हँसी का जहाँ है
मेरी दुआओं का तू ही समां है
ये कैसी कशिश है तेरी निगाहों में
खो गया हूँ मैं, ये कैसा गुमाँ है
तेरे अश्कों में डूबा हुआ हूँ मैं
तेरी हँसी में मेरा आसमां है
फुरकान कहता है, ये इश्क़ ही तो है
जिसमें हर लम्हा इक दास्तां है
Kaafiya जहाँ, गुमाँ
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
तेरी सूरत है, मेरी नज़र है
तेरे इश्क़ का मुझपे असर है
हर पल तेरी यादों में जीता हूँ
ये कैसा तेरा मंज़र है
क़दम क़दम पे तेरे निशां हैं
तेरी बातों में कैसी ख़बर है
फुरकान की यही आरज़ू है
तेरी मोहब्बत ही मेरा घर है
Kaafiya नज़र, असर
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
मोहब्बत का नग़मा
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: जहाँ, गुमाँ | Radeef: है
लबों पे तेरे हँसी का जहाँ है
मेरी दुआओं का तू ही समां है
ये कैसी कशिश है तेरी निगाहों में
खो गया हूँ मैं, ये कैसा गुमाँ है
तेरे अश्कों में डूबा हुआ हूँ मैं
तेरी हँसी में मेरा आसमां है
फुरकान कहता है, ये इश्क़ ही तो है
जिसमें हर लम्हा इक दास्तां है
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: नज़र, असर | Radeef: है
तेरी सूरत है, मेरी नज़र है
तेरे इश्क़ का मुझपे असर है
हर पल तेरी यादों में जीता हूँ
ये कैसा तेरा मंज़र है
क़दम क़दम पे तेरे निशां हैं
तेरी बातों में कैसी ख़बर है
फुरकान की यही आरज़ू है
तेरी मोहब्बत ही मेरा घर है
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