मोहब्बत का नग़मा: एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल

Furkan S Khan की लिखी हुई मोहब्बत पर एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल, जिसमें इश्क़ के एहसास को बख़ूबी बयां किया गया है।

Thursday, August 27, 2026
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मोहब्बत का नग़मा: एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल
“मोहब्बत का नग़मा: एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल”
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Date
27 August 2026
मोहब्बत का नग़मा: एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल
Ghazal
लबों पे तेरे हँसी का जहाँ है मेरी दुआओं का तू ही समां है ये कैसी कशिश है तेरी निगाहों में खो गया हूँ मैं, ये कैसा गुमाँ है तेरे अश्कों में डूबा हुआ हूँ मैं तेरी हँसी में मेरा आसमां है फुरकान कहता है, ये इश्क़ ही तो है जिसमें हर लम्हा इक दास्तां है
Kaafiya जहाँ, गुमाँ Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
तेरी सूरत है, मेरी नज़र है तेरे इश्क़ का मुझपे असर है हर पल तेरी यादों में जीता हूँ ये कैसा तेरा मंज़र है क़दम क़दम पे तेरे निशां हैं तेरी बातों में कैसी ख़बर है फुरकान की यही आरज़ू है तेरी मोहब्बत ही मेरा घर है
Kaafiya नज़र, असर Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

मोहब्बत का नग़मा

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: जहाँ, गुमाँ  |  Radeef: है
लबों पे तेरे हँसी का जहाँ है मेरी दुआओं का तू ही समां है ये कैसी कशिश है तेरी निगाहों में खो गया हूँ मैं, ये कैसा गुमाँ है तेरे अश्कों में डूबा हुआ हूँ मैं तेरी हँसी में मेरा आसमां है फुरकान कहता है, ये इश्क़ ही तो है जिसमें हर लम्हा इक दास्तां है

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: नज़र, असर  |  Radeef: है
तेरी सूरत है, मेरी नज़र है तेरे इश्क़ का मुझपे असर है हर पल तेरी यादों में जीता हूँ ये कैसा तेरा मंज़र है क़दम क़दम पे तेरे निशां हैं तेरी बातों में कैसी ख़बर है फुरकान की यही आरज़ू है तेरी मोहब्बत ही मेरा घर है

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Zainab Khatoon
लेखक

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