हौसलों की उड़ान

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: चाहत, छोड़  |  Radeef: तू हार न मानो
ये मंज़िलें भी झुकेंगी तेरी चाहत के आगे, बस हौसला बुलंद रख, तू हार न मानो। हर ठोकर सिखाएगी तुझे नया रास्ता, बस चलना न छोड़, तू हार न मानो।

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: सवेरा, बसेरा, ज़माना  |  Radeef: आता है
हर रात के बाद एक सवेरा आता है, ग़म के बाद सुख का बसेरा आता है। डर मत ऐ मुसाफ़िर, मंज़िल दूर नहीं, जो चलता है, उसी का ज़माना आता है।

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: बनाते, हराते, सजाते  |  Radeef: चलो
तूफ़ानों से लड़कर अपनी राह बनाते चलो, हर मुश्किल को हँसकर तुम हराते चलो। ये दुनिया तुम्हारी हिम्मत को देखेगी एक दिन, बस अपने सपनों को तुम सजाते चलो।