इश्क़ की रौशनी

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: उतरती, उभरती, मरता, बदलता  |  Radeef: है
इश्क़ की रौशनी जब दिल में उतरती है, हर ज़ख्म हर दर्द को वो भरती है। ख़ामोशियाँ भी तब बातें करने लगती हैं, हर साँस में बस एक धुन सी उभरती है। ये वो एहसास है जो कभी मरता नहीं, वक़्त के साथ ये कभी ढलता नहीं। रूह से रूह का ये गहरा रिश्ता है, जो कभी टूटता, कभी बदलता नहीं। सितारों सी चमक आँखों में भर जाए, हर ख्वाब हकीकत का रूप धर जाए। ये प्रेम की वो शक्ति है अज़ीज़ो, जिससे हर मुश्किल राह आसान बन जाए।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: हसीन, सीन, ज़मीन, इसमें  |  Radeef: है
मोहब्बत का सफ़र भी कितना हसीन है, हर मोड़ पर एक नया रंगीन सीन है। कभी राहों में कांटे, कभी फूल बिछे हैं, ये दिल के बाग़ों का सच्चा ज़मीन है। ये इश्क़ की आग है जो जलाती भी है, और बुझाती भी है हर गम को तसल्ली से। ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत इसमें, बस एक मीठा सा एहसास बाकी है इसमें। ना जाने कितनी सदियाँ बीत गईं इसमें, कितने आशिक़ों ने जान दी है इसमें। ये सिलसिला चलता रहेगा यूँ ही, ज़िन्दगी की हर साँस है इसमें।