इश्क़ की रौशनी: प्रेम पर एक ख़ूबसूरत नज़्म - फ़ुरक़ान एस ख़ान

फ़ुरक़ान एस ख़ान की कलम से प्रेम की रौशनी पर एक दिल छू लेने वाली नज़्म। इश्क़ के गहरे एहसास और उसकी अद्भुत शक्ति को दर्शाती ये कविता।

Saturday, August 29, 2026
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इश्क़ की रौशनी: प्रेम पर एक ख़ूबसूरत नज़्म - फ़ुरक़ान एस ख़ान
“इश्क़ की रौशनी: प्रेम पर एक ख़ूबसूरत नज़्म - फ़ुरक़ान एस ख़ान”
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29 August 2026
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Nazm By Furkan S Khan
इश्क़ की रौशनी जब दिल में उतरती है, हर ज़ख्म हर दर्द को वो भरती है। ख़ामोशियाँ भी तब बातें करने लगती हैं, हर साँस में बस एक धुन सी उभरती है। ये वो एहसास है जो कभी मरता नहीं, वक़्त के साथ ये कभी ढलता नहीं। रूह से रूह का ये गहरा रिश्ता है, जो कभी टूटता, कभी बदलता नहीं। सितारों सी चमक आँखों में भर जाए, हर ख्वाब हकीकत का रूप धर जाए। ये प्रेम की वो शक्ति है अज़ीज़ो, जिससे हर मुश्किल राह आसान बन जाए।
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Nazm By Furkan S Khan
मोहब्बत का सफ़र भी कितना हसीन है, हर मोड़ पर एक नया रंगीन सीन है। कभी राहों में कांटे, कभी फूल बिछे हैं, ये दिल के बाग़ों का सच्चा ज़मीन है। ये इश्क़ की आग है जो जलाती भी है, और बुझाती भी है हर गम को तसल्ली से। ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत इसमें, बस एक मीठा सा एहसास बाकी है इसमें। ना जाने कितनी सदियाँ बीत गईं इसमें, कितने आशिक़ों ने जान दी है इसमें। ये सिलसिला चलता रहेगा यूँ ही, ज़िन्दगी की हर साँस है इसमें।

इश्क़ की रौशनी

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: उतरती, उभरती, मरता, बदलता  |  Radeef: है
इश्क़ की रौशनी जब दिल में उतरती है, हर ज़ख्म हर दर्द को वो भरती है। ख़ामोशियाँ भी तब बातें करने लगती हैं, हर साँस में बस एक धुन सी उभरती है। ये वो एहसास है जो कभी मरता नहीं, वक़्त के साथ ये कभी ढलता नहीं। रूह से रूह का ये गहरा रिश्ता है, जो कभी टूटता, कभी बदलता नहीं। सितारों सी चमक आँखों में भर जाए, हर ख्वाब हकीकत का रूप धर जाए। ये प्रेम की वो शक्ति है अज़ीज़ो, जिससे हर मुश्किल राह आसान बन जाए।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: हसीन, सीन, ज़मीन, इसमें  |  Radeef: है
मोहब्बत का सफ़र भी कितना हसीन है, हर मोड़ पर एक नया रंगीन सीन है। कभी राहों में कांटे, कभी फूल बिछे हैं, ये दिल के बाग़ों का सच्चा ज़मीन है। ये इश्क़ की आग है जो जलाती भी है, और बुझाती भी है हर गम को तसल्ली से। ना कोई शिकवा, ना कोई शिकायत इसमें, बस एक मीठा सा एहसास बाकी है इसमें। ना जाने कितनी सदियाँ बीत गईं इसमें, कितने आशिक़ों ने जान दी है इसमें। ये सिलसिला चलता रहेगा यूँ ही, ज़िन्दगी की हर साँस है इसमें।

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Zainab
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