उम्मीद की किरण
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: राहें, बाहें | Radeef: जाए
जब लगे अँधेरा गहरा,
और सूझे ना कोई राहें।
मन को थाम के तू बस इतना कह,
हर मुश्किल आसान हो जाए।
गिर के उठना है सीखा,
तूफानों से ना घबराए।
अपने हौसले को तू बुलंद रख,
हर ख्वाहिश पूरी हो जाए।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: डगर, सफ़र | Radeef: चले
मत थक ऐ मुसाफिर, ये राहें हैं लंबी,
पर हौसला रख, तू मंज़िल की ओर चले।
हर ठोकर सिखाएगी, हर दर्द देगा सहारा,
तू अपनी हिम्मत से आगे बढ़ता चले।
ज़िन्दगी एक इम्तेहान है, हर पल एक नया मोड़,
गिर के संभलना ही तो है, यूँ हार ना माने चले।
ख्वाबों को हकीकत में बदलना है गर तुझे,
तो रात दिन एक कर, अपने जुनून से चले।