दर्द का शहर: Furkan S Khan की क़ितात
Furkan S Khan द्वारा रचित 'कसक ज़िंदाँ की' क़ितात, जो दर्द की गहराई और अकेलेपन की भावनाओं को व्यक्त करती है।
निहाँ: छिपा हुआ, गुप्त। वीरान: सूना, उजाड़। शो'ला: आग की लपट, ज्वाला। सुलगता: धीरे-धीरे जलना, भड़कना। इम्तिहाँ: परीक्षा, कसौटी।
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