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अस्वीकृत मुहब्बत: प्यार में इंकार का दर्द - Furkan S Khan

Furkan S Khan की यह मुहब्बत शायरी प्यार में इंकार और उसके गहरे दर्द को बयाँ करती है। एकतरफ़ा मुहब्बत की दास्तान, जहाँ दिल में दर्द और यादें बस जाती हैं।

Monday, September 21, 2026
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अस्वीकृत मुहब्बत: प्यार में इंकार का दर्द - Furkan S Khan
“अस्वीकृत मुहब्बत: प्यार में इंकार का दर्द - Furkan S Khan”
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21 September 2026
अस्वीकृत मुहब्बत: प्यार में इंकार का दर्द - Furkan S Khan
मुहब्बत शायरी
तेरी नज़रों ने जब किया, मेरे हर ख़्वाब का तब संहार किया। तेरी दुनिया में अब न मेरा बसेरा, फिर भी दिल में है तेरा ही डेरा। माना, तूने अपनी राहें जुदा कर लीं, हमने भी खामोशी से ये सज़ा भर ली।
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Kaafiya इन्कार, संहार; बसेरा, डेरा; कर, भर Radeef किया; (implicit 'है'); ली
F Poetry ByFurkan S Khan
मुहब्बत शायरी
तेरा जाना भी एक था, मेरी हर साँस में अब तू बेज़ुबान था। जो ख़्वाब बुने थे, सब बिखर गए, तेरी राहों से हम यूँ मुकर गए। न शिकायत, न कोई अब है, ये दर्द भी अब हमें मंज़ूर मिला है।
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Kaafiya इम्तिहान, बेज़ुबान; बिखर, मुकर; गिला, मिला Radeef था; गए; है
F Poetry ByFurkan S Khan
मुहब्बत शायरी
तेरी यादों का अब है, ये दिल आज भी तेरा ही मारा है। जो राहें कभी साथ चली थीं, वो अब बेगाने से ढली थीं। न शिकवा, न कोई अब है, बस तेरी ख़ुशी ही मेरी मुराद है।
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Kaafiya आसरा, मारा; चलीं, ढलीं; फ़रियाद, मुराद Radeef है; थीं; है
F Poetry ByFurkan S Khan

इन्कार: अस्वीकृति, मना करना। संहार: विनाश, पूरी तरह खत्म कर देना।

इम्तिहान: परीक्षा, कसौटी। गिला: शिकायत, शिकवा।

आसरा: सहारा, अवलंब। फ़रियाद: शिकायत, गुहार, प्रार्थना।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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