उदासी का सफर
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: जाती, भाती, आती | Radeef: नहीं
एक उदासी है जो दिल से जाती नहीं
ज़िंदगी की राह अब भाती नहीं
हर तरफ़ ग़म का साया है गहरा
कोई उम्मीद की किरण नज़र आती नहीं
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: छुपा, दबा, खफा | Radeef: है
खामोशी में भी एक शोर छुपा है
हर आंसू में गहरा राज़ दबा है
क्या कहूँ, क्या लिखूँ इस ग़म को
जब हर लफ्ज़ मेरा आज खफा है
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: खेला, मेला, अकेला | Radeef: है
तकदीर ने कैसा खेल खेला है
हर तरफ़ बस ग़म का मेला है
दिल में दर्द की आग लगी है
और कोई नहीं जो साथ अकेला है