यह नज़्म उदासी और अकेलेपन की गहरी भावना को व्यक्त करती है। कवि बताता है कि कैसे उसके चारों ओर उदासी की चादर फैली हुई है और उसकी आत्मा अकेली महसूस करती है। ख़ुशियाँ अब बेमानी लगती हैं और दर्द ही अब सुकून देता है। दिल में गहरा सन्नाटा है और किसी नए सवेरे की उम्मीद नहीं। साँसों में भी उदासी घुली है और आत्मा केवल यादों की प्यासी है।

यह नज़्म टूटे हुए सपनों, अकेलेपन और गहरे दुःख को दर्शाती है। कवि महसूस करता है कि उसकी ज़िन्दगी अब बेगानी हो गई है और दिल के हर कोने में वीरानी छाई है। आँसू लगातार बह रहे हैं, पर कोई सुनने वाला नहीं। हर रात ग़म के साये में ढली है और दिन की बातें भी सूनी हो गई हैं।

यह नज़्म उस आंतरिक उदासी को बयां करती है जो बाहर से शांत दिखती है पर भीतर से शोर मचाती है। कवि के होंठों पर मुस्कान है, पर दिल उदास है और उसकी बेबस प्यास को कोई नहीं समझता। भीड़ में भी उसे तन्हाई का एहसास होता है और हर ख़ुशी एक पीड़ा बन गई है। जीवन की हर राह अंधेरों में डूबी है, कोई मंज़िल या परवाह नहीं दिखती।