प्रेम का सार: रूहानी बंधन पर एक खूबसूरत क़िता - फुरकान एस खान

फुरकान एस खान द्वारा रचित 'प्रेम का सार' एक मनमोहक क़िता है जो प्रेम के रूहानी और गहरे बंधन को व्यक्त करती है। यह कविता दिल की गहराइयों से निकली भावनाओं को दर्शाती है।

Thursday, September 17, 2026
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प्रेम का सार: रूहानी बंधन पर एक खूबसूरत क़िता - फुरकान एस खान
“प्रेम का सार: रूहानी बंधन पर एक खूबसूरत क़िता - फुरकान एस खान”
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17 September 2026
प्रेम का सार: रूहानी बंधन पर एक खूबसूरत क़िता - फुरकान एस खान
Qita — By Furkan S Khan
जब से देखा है तुम्हें, दिल में एक अरमान है, तेरी चाहत में हर पल अब ये दिल बेजान है। रूह से रूह का ये कैसा अनमोल बंधन है, तेरी धड़कन में मेरी अब हर एक पहचान है।
Qita — By Furkan S Khan
इश्क़ की राहों में खो गए हम कुछ इस क़दर, हर मंज़िल अब लगती है तेरी ही डगर। तेरी आँखों में देखा है मैंने अपना जहाँ, अब तो बस तू ही है मेरी शाम-ओ-सहर।

अरमान: इच्छा, ख्वाहिश बेजान: प्राणहीन, शक्तिहीन बंधन: संबंध, जुड़ाव पहचान: परिचय, शिनाख्त

क़दर: सीमा, हद डगर: रास्ता, मार्ग जहाँ: दुनिया, संसार शाम-ओ-सहर: शाम और सुबह, हर पल

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Zainab
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