इश्क़ का सफ़र
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: नज़र, सहर, असर | Radeef: है
तेरी आँखों में जो मंज़िल है,
मेरी दुनिया वहीं हासिल है।
तेरे बिन हर लम्हा मुश्किल है,
तू ही मेरी मंज़िल है।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: धड़कनें, तड़पें, सुलझें | Radeef: हैं
मेरी हर धड़कन में तू ही तू है,
तेरी यादों में हर पल रोता हूँ।
जब तू ना हो, सब कुछ सूना है,
तेरे बिना मैं क्या हूँ?