इश्क़ का अनमोल सफ़र
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: गूँजता, बसता, मिटता, सहता, जलता, भरता, मचलता, गुज़रता
Radeef: है
इश्क़ वो नग्मा है, जो हर साँस में गूँजता है,
हर धड़कन में जिसका, नाम बसता है।
ये रूह का रिश्ता है, जो कभी न मिटता है,
हर ज़ख्म को भरता है, हर दर्द को सहता है।
ये वो चिराग़ है, जो अंधेरों में जलता है,
हर राहगुज़र को अपनी, रोशनी से भरता है।
जब से तू मिला है, दिल मेरा मचलता है,
तेरी यादों में हर पल, मेरा वक़्त गुज़रता है।
हर धड़कन में जिसका, नाम बसता है।
ये रूह का रिश्ता है, जो कभी न मिटता है,
हर ज़ख्म को भरता है, हर दर्द को सहता है।
ये वो चिराग़ है, जो अंधेरों में जलता है,
हर राहगुज़र को अपनी, रोशनी से भरता है।
जब से तू मिला है, दिल मेरा मचलता है,
तेरी यादों में हर पल, मेरा वक़्त गुज़रता है।
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: जाती, बनती, समझी, परखी, आती, दिखाती, चमकाती, जगाती
Radeef: है
मोहब्बत एक कहानी है, जो हर दिल में लिखी जाती है,
हर नज़र में उसकी, एक नई तस्वीर बनती है।
ये वो ज़ुबाँ है, जो ख़ामोशी में भी समझी जाती है,
हर लम्हे में जिसकी, गहराई परखी जाती है।
कभी फूलों सी नाज़ुक, कभी आँधी सी आती है,
हर इम्तिहान में अपने, सच्चे रंग दिखाती है।
ये ज़िंदगी की रौशनी है, जो सब कुछ चमकाती है,
हर जुदाई के बाद भी, मिलने की उम्मीद जगाती है।
हर नज़र में उसकी, एक नई तस्वीर बनती है।
ये वो ज़ुबाँ है, जो ख़ामोशी में भी समझी जाती है,
हर लम्हे में जिसकी, गहराई परखी जाती है।
कभी फूलों सी नाज़ुक, कभी आँधी सी आती है,
हर इम्तिहान में अपने, सच्चे रंग दिखाती है।
ये ज़िंदगी की रौशनी है, जो सब कुछ चमकाती है,
हर जुदाई के बाद भी, मिलने की उम्मीद जगाती है।