गम का साया: फ़ुरकान एस खान की उदासी भरी ग़ज़ल
फ़ुरकान एस खान द्वारा रचित 'गम का साया' ग़ज़ल में उदासी, तन्हाई और दिल के दर्द को खूबसूरती से बयां किया गया है। दिल छू लेने वाली हिन्दी कविता।
दिल का हर सुकून अब तो खो गया,
आँखों का वो नूर भी सो गया।
हँसने का अंदाज़ अब तो रो गया,
हर दर्द अब रूह में बो गया।
क्या कहूँ अब हाल-ए-दिल किसी से,
जो था कभी अपना, वो पराया हो गया।
'फुरकान' अब तो जीने का सबब भी,
गम की चादर ओढ़कर सो गया।
Kaafiya खो, सो, रो, बो, हो
Radeef गया
F
Poetry ByFurkan S Khan
दिल में छुपा इक गहरा दर्द है,
मौसम-ए-गम भी कितना सर्द है।
कौन समझे मेरे इस हाल को,
हर शख्स अब तो बेदर्द है।
रोशनी भी अब तो धुंधली सी है,
हर तरफ बस एक ही दर्द है।
'फुरकान' अब ये कैसी रुसवाई है,
हर खुशी भी अब तो बेदर्द है।
Kaafiya दर्द, सर्द, बेदर्द
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
गम का साया
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: खो, सो, रो, बो, हो | Radeef: गया
दिल का हर सुकून अब तो खो गया,
आँखों का वो नूर भी सो गया।
हँसने का अंदाज़ अब तो रो गया,
हर दर्द अब रूह में बो गया।
क्या कहूँ अब हाल-ए-दिल किसी से,
जो था कभी अपना, वो पराया हो गया।
'फुरकान' अब तो जीने का सबब भी,
गम की चादर ओढ़कर सो गया।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: दर्द, सर्द, बेदर्द | Radeef: है
दिल में छुपा इक गहरा दर्द है,
मौसम-ए-गम भी कितना सर्द है।
कौन समझे मेरे इस हाल को,
हर शख्स अब तो बेदर्द है।
रोशनी भी अब तो धुंधली सी है,
हर तरफ बस एक ही दर्द है।
'फुरकान' अब ये कैसी रुसवाई है,
हर खुशी भी अब तो बेदर्द है।
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