ग़म-ए-ज़िंदगी: फ़ुरकान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल

फ़ुरकान एस ख़ान की यह ग़ज़ल ज़िंदगी के गहरे दुख और तन्हाई को बयां करती है। सुकून की तलाश और बेकसी का दर्द इसमें झलकता है।

Tuesday, September 1, 2026
AMP 0 2
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
ग़म-ए-ज़िंदगी: फ़ुरकान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल
“ग़म-ए-ज़िंदगी: फ़ुरकान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल”
Favicon
Vews
https://vews.in/hum-aur-zindagi/gham-e-zindagi-furkan-s-khans-heart-touching-sad-ghazal
Date
01 September 2026
ग़म-ए-ज़िंदगी: फ़ुरकान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल
Ghazal
अब दिल को कहीं भी सुकून मिलता नहीं है, कोई फूल चाहत का अब खिलता नहीं है हर राह पे तन्हा है ये कारवाँ अपना, कोई हमसफ़र संग अब चलता नहीं है आँखों से जो बहते हैं दरिया ये अश्कों के, इन आँसुओं से दिल ये गलता नहीं है शब-ओ-रोज़ ढलते हैं बस बेकसी में, ये ग़म का अंधेरा कभी ढलता नहीं है इस दिल में जो दर्द है, वो बेज़ुबान है, कोई समझे, ऐसा कोई मिलता नहीं है
Kaafiya मिलता, खिलता, चलता, गलता, ढलता Radeef नहीं है
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
गर जिंदगी में हमको खुशी मिली नहीं तो क्या हुआ, लबों पे अपने कभी हँसी खिली नहीं तो क्या हुआ तन्हाई के इस सफ़र में हम चले हैं सदियों से, राहों में हमको कोई मंज़िल मिली नहीं तो क्या हुआ हर अजनबी से उम्मीदें लगाए बैठे थे हम, किसी की भी आँख से नज़र मिली नहीं तो क्या हुआ ढूँढते रहे प्यार को दर-ब-दर हम गली-गली, किसी दिल से अपने कोई कली खिली नहीं तो क्या हुआ इस बेबसी को अब किस्मत का खेल मान लिया, जो ख़्वाब देखे थे, वो तकमील मिली नहीं तो क्या हुआ
Kaafiya मिली, खिली, मिली, गली, मिली Radeef नहीं तो क्या हुआ
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
अब तो अश्कों को भी रोकना नहीं आता, इस दिल को ज़रा भी सँवरना नहीं आता हर बात पे मुस्कुराते थे कभी हम भी, अब तो ग़म में भी हमको संभलना नहीं आता ये कैसा दर्द है जो सीने में पल रहा है, जिसके बोझ से दिल को बहलना नहीं आता हर राह पे तन्हाई का साया है घना, इस अंधेर से बाहर निकलना नहीं आता अब तो हर याद में बस उदासी घुली है, बीते लम्हों को फिर से टटोलना नहीं आता
Kaafiya रोकना, सँवरना, संभलना, बहलना, निकलना, टटोलना Radeef नहीं आता
F Poetry ByFurkan S Khan

सुकून: शांति, चैन चाहत: प्रेम, इच्छा कारवाँ: काफिला, समूह हमसफ़र: साथी अश्कों: आँसुओं दरिया: नदी शब-ओ-रोज़: रात और दिन बेकसी: लाचारी, बेबसी ग़म: दुख बेज़ुबान: खामोश, जिसे व्यक्त न किया जा सके

लबों: होंठों सदियों: बहुत लंबे समय मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य अजनबी: अनजान व्यक्ति दर-ब-दर: दर-दर, हर जगह कली: फूल की कली (यहाँ प्रेम के अंकुर से तात्पर्य) बेबसी: लाचारी तकमील: पूर्णता, पूरा होना

अश्कों: आँसुओं रोकना: रोकना, थामना सँवरना: सँवरना, ठीक होना संभलना: खुद को संभालना बहलना: मन बहलाना, शांत होना घना: गहरा, सघन टटोलना: खोजना, याद करना

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab Khatoon
लेखक

A passionate content creator sharing meaningful baby names, Islamic names and their beautiful meanings, along with the latest news and informative stories. Bringing knowledge, culture, and updates together.

Comments (0)

User