इश्क़-ए-बेमिसाल: रूहानी प्रेम पर दिल छू लेने वाली हिंदी ग़ज़ल
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'इश्क़-ए-बेमिसाल' एक ऐसी हिंदी ग़ज़ल है जो प्रेम की गहराई, आश्रय और रूहानी अहसास को बयां करती है। पढ़िए और महसूस कीजिए सच्चे इश्क़ का जादू।
निगाह: दृष्टि, देखना पनाह: शरण, आश्रय राह: रास्ता गुनाह: पाप (यहां प्रेम को एक 'पावन गुनाह' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि यह इतना पवित्र है कि इसे पाप भी कहा जाए तो वह स्वीकार्य है) वाह: प्रशंसा आह: गहरी साँस
सहर: सुबह तसव्वुर: कल्पना, विचार नज़र: दृष्टि असर: प्रभाव जुनूँ: जुनून, पागलपन तलब: चाहत, इच्छा सफ़र: यात्रा दीद: दर्शन गँवारा: स्वीकार्य रहगुज़र: रास्ता, मार्ग
करम: कृपा, मेहरबानी दम: साँस, पल वीरान: उजाड़, सुनसान ग़म: दुख ऐतबार: विश्वास हमदम: साथी, हमराज़ क़सम: शपथ हसीं: सुंदर मौसम: ऋतु, समय
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