ग़म की परछाई: दिल को छू लेने वाली हिंदी नाज़्म | उदासी पर कविता
ग़म की परछाई नामक इस मार्मिक हिंदी नाज़्म में कवि ने उदासी और अकेलेपन की गहराई को बयां किया है। भावनाओं से भरी यह कविता हर दिल को छू लेगी।
परछाई: साया, छाया गहराई: बहुत अंदर तक हमराही: साथ चलने वाला, साथी
नमी: गीलापन, आँसू लबों: होंठों इम्तिहान: परीक्षा तूफान: आँधी, बहुत बड़ी हलचल वीरान: उजाड़, खाली
पहरा: निगरानी, चौकसी गहरा: बहुत अधिक, अंदर तक डेरा: पड़ाव, ठिकाना
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