ग़म की मुस्कान: उदासी पर फ़ुरकान एस खान की ग़ज़ल
फ़ुरकान एस खान की यह ग़ज़ल दिल के गहरे ग़म, छुपी हुई उदासी और लबों पर झूठी मुस्कान के दर्द को बयाँ करती है। तन्हाई और दिल की बेचैनी का सुंदर चित्रण।
वीराने: सुनसान जगह, अकेलापन। अंजान: अपरिचित, जिसे पता न हो।
बेजान: निर्जीव, जिसमें जान न हो। शोर-ओ-गुल: अत्यधिक शोर, हंगामा।
शिद्दत: तीव्रता, प्रबलता। अरमान: इच्छा, अभिलाषा। शमशान: (यहाँ) जलती हुई पीड़ा, अंतहीन दुख।
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