उदासी का आलम: फ़ुरक़ान एस ख़ान की मार्मिक किता
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'उदासी का आलम' किता में दिल के गहरे दर्द और अकेलेपन को महसूस करें। हिंदी कविता का एक मार्मिक अनुभव।
उदासी का आलम है, दिल उदास है
हर खुशी से अब तो दूरी का एहसास है
अश्कों में बह गई वो सारी चाहतें
जब से तू नहीं, हर पल एक प्यास है
Kaafiya उदास, एहसास, प्यास
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
ये दिल है जो बस ग़म से भरा है
हर साँस में अब एक दर्द छुपा है
कहाँ ढूँढें वो सुकून की राहें
जब हर मोड़ पे बस अँधेरा खड़ा है
Kaafiya भरा, छुपा, खड़ा
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
रातें लम्बी, दिन भी अब बेजान से हैं
खुशियाँ जैसे रूठी हुई मेहमान से हैं
कोई पूछे न हाल, न कोई बात करे
हम तो बस अपने ही टूटे अरमान से हैं
Kaafiya बेजान, मेहमान, अरमान
Radeef से हैं
F
Poetry ByFurkan S Khan
उदासी का आलम
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: उदास, एहसास, प्यास | Radeef: है
उदासी का आलम है, दिल उदास है
हर खुशी से अब तो दूरी का एहसास है
अश्कों में बह गई वो सारी चाहतें
जब से तू नहीं, हर पल एक प्यास है
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: भरा, छुपा, खड़ा | Radeef: है
ये दिल है जो बस ग़म से भरा है
हर साँस में अब एक दर्द छुपा है
कहाँ ढूँढें वो सुकून की राहें
जब हर मोड़ पे बस अँधेरा खड़ा है
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: बेजान, मेहमान, अरमान | Radeef: से हैं
रातें लम्बी, दिन भी अब बेजान से हैं
खुशियाँ जैसे रूठी हुई मेहमान से हैं
कोई पूछे न हाल, न कोई बात करे
हम तो बस अपने ही टूटे अरमान से हैं
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