उदासी का आलम
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: उदास, एहसास, प्यास | Radeef: है
उदासी का आलम है, दिल उदास है
हर खुशी से अब तो दूरी का एहसास है
अश्कों में बह गई वो सारी चाहतें
जब से तू नहीं, हर पल एक प्यास है
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: भरा, छुपा, खड़ा | Radeef: है
ये दिल है जो बस ग़म से भरा है
हर साँस में अब एक दर्द छुपा है
कहाँ ढूँढें वो सुकून की राहें
जब हर मोड़ पे बस अँधेरा खड़ा है
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: बेजान, मेहमान, अरमान | Radeef: से हैं
रातें लम्बी, दिन भी अब बेजान से हैं
खुशियाँ जैसे रूठी हुई मेहमान से हैं
कोई पूछे न हाल, न कोई बात करे
हम तो बस अपने ही टूटे अरमान से हैं