इश्क का दरिया - Furkan S Khan द्वारा रचित हिंदी ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा रचित एक भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल जो इश्क और मोहब्बत की गहराई को दर्शाती है।

Saturday, August 29, 2026
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इश्क का दरिया - Furkan S Khan द्वारा रचित हिंदी ग़ज़ल
“इश्क का दरिया - Furkan S Khan द्वारा रचित हिंदी ग़ज़ल”
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Date
29 August 2026
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Ghazal By Furkan S Khan
तेरी आँखों में मोहब्बत का गहरा असर है मेरी रूह का अब तो बस यही एक डगर है ढूंढता फिरता हूँ मैं खुद को जहाँ में मगर तेरी यादों का मेरे दिल में ही घर है
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Ghazal By Furkan S Khan
मेरे रूबरू तू आज भी कितना पास है तेरी खुशबू का मुझमें ही एक एहसास है तू जो नहीं तो ये महफिल भी वीरान है मेरे लिए बस तेरा होना ही सबसे खास है

इश्क का दरिया

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: नजर, असर, डगर  |  Radeef: है
तेरी आँखों में मोहब्बत का गहरा असर है मेरी रूह का अब तो बस यही एक डगर है ढूंढता फिरता हूँ मैं खुद को जहाँ में मगर तेरी यादों का मेरे दिल में ही घर है

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: पास, एहसास, खास  |  Radeef: है
मेरे रूबरू तू आज भी कितना पास है तेरी खुशबू का मुझमें ही एक एहसास है तू जो नहीं तो ये महफिल भी वीरान है मेरे लिए बस तेरा होना ही सबसे खास है

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Zainab
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