इश्क का दरिया

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: नजर, असर, डगर  |  Radeef: है
तेरी आँखों में मोहब्बत का गहरा असर है मेरी रूह का अब तो बस यही एक डगर है ढूंढता फिरता हूँ मैं खुद को जहाँ में मगर तेरी यादों का मेरे दिल में ही घर है

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: पास, एहसास, खास  |  Radeef: है
मेरे रूबरू तू आज भी कितना पास है तेरी खुशबू का मुझमें ही एक एहसास है तू जो नहीं तो ये महफिल भी वीरान है मेरे लिए बस तेरा होना ही सबसे खास है