क्रोध की अग्नि: जलते हुए मन की दास्तान
क्रोध की विनाशकारी शक्ति को दर्शाती यह कविता, मन में उठते तूफ़ान और उसके बाद के पछतावे का मार्मिक चित्रण करती है।
चिंगारी: छोटी आग, शुरुआत। तूफ़ान: आँधी, बवंडर। ज़हर: विष। विवेक: सही-गलत का ज्ञान। आवेश: गुस्सा, उत्तेजना। राख: जली हुई वस्तु का अवशेष। पछतावा: गलती का अफ़सोस। खालीपन: सूनापन, रिक्तता।
लहर: पानी का बहाव। सुनामी: बड़ी समुद्री लहर। तर्क: दलील, वजह। कड़वाहट: तीखापन, अप्रियता। निगाहों: आँखों। नियंत्रण: काबू। शक्ति: ताक़त। घाव: चोट। ग्रहण: किसी अच्छी चीज़ पर बुरा प्रभाव। भस्म: जलकर राख हो जाना। खंडहर: टूटी इमारतें। पश्चाताप: अफ़सोस, पछतावा। धीरज: धैर्य, सब्र।
अँधेरा: अंधकार। आकाश: आसमान। बिजली: दामिनी। अंगारा: दहकता कोयला। गर्जना: दहाड़, तेज़ आवाज़। महल: बड़ा भवन। किरण: प्रकाश की रेखा। खंजर: छोटा चाकू। कड़वाहटें: तीखी बातें, अप्रियताएँ। मिठास: मधुरता। ज़िद: हठ। स्याह: काला। अवशेष: बचा हुआ भाग। सुकून: शांति। दामन: आँचल, साथ।
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