विस्मय के रंग: फ़ुरकान एस ख़ान की आध्यात्मिक सूफी कविता
फ़ुरकान एस ख़ान द्वारा रचित 'विस्मय के रंग' एक मार्मिक सूफी कविता है जो ब्रह्मांड के हर कण में ईश्वर की अद्भुत उपस्थिति और रहस्यमय सुंदरता को दर्शाती है।
ज़र्रे: कण, छोटा हिस्सा रवानी: बहाव, गति सूरत: रूप, आकृति ठहरी: बसी हुई, स्थिर लाली: लालिमा, सुबह की रोशनी खुशाली: प्रसन्नता, खुशी भँवरों: भौरों का बहुवचन गुँजना: भौरों की आवाज़ सूँ: दिशा, तरफ़ पंथ: मार्ग, रास्ता हैरत: आश्चर्य, अचंभा सुकून: शांति, चैन फ़साना: कहानी, वृत्तांत पहरा: निगरानी, चौकसी भटकता: घूमता रहा, भटकता रहा झलकता: दिखाई देता रहा, प्रकट होता रहा इबादत: पूजा, उपासना अदा: अंदाज़, शैली चाहत: इच्छा, प्रेम
लगन: निष्ठा, लगाव भाए: पसंद आए, अच्छा लगे दोहराए: बार-बार कहे जुनून: गहरा प्रेम, धुन सुकून: शांति, चैन ज़माना: दुनिया पागल: उन्मत्त दीवाना: प्रेमी, मग्न गली: मार्ग, रास्ता सहे: सहन करे, बर्दाश्त करे अक्स: प्रतिबिंब, परछाई समाए: समाहित हो, बस जाए आबाद: बसा हुआ, फलता-फूलता (यहाँ आश्रय) इश्क़-ए-हक़ीक़ी: सच्चा प्रेम, ईश्वरीय प्रेम रूह: आत्मा पुकार: बुलावा, आवाज़ साक़ी: शराब पिलाने वाला (सूफी मत में ईश्वरीय प्रेम का प्रतीक) यार: मित्र, प्रियतम पर्दों: आवरण, परदे मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य राहत: आराम, शांति
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