प्रेम का चिरंतन राग: एक रूहानी मोहब्बत की दास्तान

कवि फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'प्रेम का चिरंतन राग' एक मसनवी है जो सच्चे और रूहानी प्रेम की गहराई को बयाँ करती है। इस कविता में दिल से निकली भावनाओं और अमर प्रेम की कहानी को सुंदर शब्दों में पिरोया गया है।

Saturday, September 19, 2026
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प्रेम का चिरंतन राग: एक रूहानी मोहब्बत की दास्तान
“प्रेम का चिरंतन राग: एक रूहानी मोहब्बत की दास्तान”
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19 September 2026
प्रेम का चिरंतन राग: एक रूहानी मोहब्बत की दास्तान
Masnavi
जब से देखा है तुम्हें, दिल में एक बात उठी, हर धड़कन में तुम्हारी ही अब आवाज़ उठी। थी सूनी ज़िन्दगी मेरी, तुम आए तो बहार आई, हर पल में एक नई उम्मीद की किरण लहराई। तुम्हारी आँखों में देखा, गहराई का समंदर था, हर लहर में छिपा, कोई अनोखा मंज़र था। तुम्हारी साँसों की ख़ुशबू, हवाओं में घुल गई है, मेरी रूह में समाकर, एक नई दुनिया खुल गई है। अब हर सुबह तुम्हारी याद से होती है रोशन, तुम्हारे नाम से ही खिलता है मेरा हर गुलशन। तुम्हारे बिन ये जहाँ, एक वीराना सा लगता है, तुम्हारे साथ हर पल, एक अफ़साना सा लगता है। यह प्रेम नहीं, यह तो रूह का संगम है, ज़िंदगी का सबसे हसीं, अनमोल सरगम है। न कोई शर्त इसमें, न कोई बंदिशें हैं, यह तो बस एक एहसास, जो रूहानी कशिशें हैं। चाहत की डगर पर, अब चलना है यूँ ही साथ, थामे रखना सदा, मेरे हाथों में अपना हाथ। यही दुआ है मेरी, यह बंधन अमर रहे, हमारी प्रेम कहानी, हर युग में बसर करे।
Kaafiya उठी, आई, था, गई है, गुलशन, लगता है, सरगम है, कशिशें हैं, हाथ, रहे
F Poetry ByFurkan S Khan
Masnavi
जब से हुआ है तुमसे ये मेरा दिल आशना, दुनिया बदल गई है, हर शय है दिलरुबा। तुम्हारी चाहतों में, खोया है मेरा वजूद, हर साँस में बसी है, अब तुम्हारी ही खुशबू। तुमसे मिलकर मिली है, इक नई पहचान मुझे, दूर हुए सारे ग़म, मिली है मुस्कान मुझे। तुम्हारी नज़रों में देखा, मैंने अपना जहान, हर लम्हा है प्यारा, हर पल है मेहरबान। ये इश्क़ नहीं, ये तो रब की इनायत है, तुम्हें पाकर मिली है, जीवन की राहत है। तुम्हारे क़दमों की आहट, दिल में करती है दस्तक, तुम्हारे नाम से ही, हर आरज़ू है अब तक। ये कैसा नशा है, जो मुझ पर छा गया है, हर पल तुम्हारा ही, ख़्याल मन भा गया है। तुम्हारी बातें हैं मीठी, जैसे कोई धुन सलोनी, तुम्हारे संग हर पल, है ये दुनिया सुहानी। खुदा करे ये रिश्ता, कभी ना टूटे ये डोर, हमेशा रहे ये क़ायम, इस प्रेम का हर दौर। तुम्हारे प्रेम में खोकर, पा लिया है मैंने सब, यही है मेरी जन्नत, यही है मेरा रब।
Kaafiya आशना/दिलरुबा, वजूद/खुशबू, पहचान/मुस्कान, जहान/मेहरबान, इनायत/राहत, दस्तक/अब तक, गया है/भा गया है, सलोनी/सुहानी, डोर/दौर, सब/रब
F Poetry ByFurkan S Khan

चिरंतन: शाश्वत, कभी न खत्म होने वाला। अनमोल: बहुमूल्य। मंज़र: दृश्य। रूह: आत्मा। गुलशन: बाग़, बगीचा। वीराना: सुनसान जगह। अफ़साना: कहानी। संगम: मिलन। सरगम: संगीत के सुरों का क्रम। कशिशें: आकर्षण। डगर: रास्ता। बसर करे: रहे, जीवित रहे।

आशना: परिचित। दिलरुबा: प्रिय, मनमोहक। वजूद: अस्तित्व। इनायत: कृपा, मेहरबानी। राहत: सुकून, आराम। दस्तक: खटखटाहट। आरज़ू: इच्छा, तमन्ना। ख़्याल: विचार। सलोनी: सुंदर, आकर्षक। सुहानी: सुखद, मनभावन। क़ायम: स्थापित, स्थायी। दौर: समय, काल। जन्नत: स्वर्ग।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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