प्रेम का चिरंतन राग: एक रूहानी मोहब्बत की दास्तान
कवि फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'प्रेम का चिरंतन राग' एक मसनवी है जो सच्चे और रूहानी प्रेम की गहराई को बयाँ करती है। इस कविता में दिल से निकली भावनाओं और अमर प्रेम की कहानी को सुंदर शब्दों में पिरोया गया है।
चिरंतन: शाश्वत, कभी न खत्म होने वाला। अनमोल: बहुमूल्य। मंज़र: दृश्य। रूह: आत्मा। गुलशन: बाग़, बगीचा। वीराना: सुनसान जगह। अफ़साना: कहानी। संगम: मिलन। सरगम: संगीत के सुरों का क्रम। कशिशें: आकर्षण। डगर: रास्ता। बसर करे: रहे, जीवित रहे।
आशना: परिचित। दिलरुबा: प्रिय, मनमोहक। वजूद: अस्तित्व। इनायत: कृपा, मेहरबानी। राहत: सुकून, आराम। दस्तक: खटखटाहट। आरज़ू: इच्छा, तमन्ना। ख़्याल: विचार। सलोनी: सुंदर, आकर्षक। सुहानी: सुखद, मनभावन। क़ायम: स्थापित, स्थायी। दौर: समय, काल। जन्नत: स्वर्ग।
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