क्रोध की अग्नि: रिश्तों को जलाती एक ज्वाला | Qit'a
इस Qit'a में क्रोध की विनाशकारी प्रकृति और रिश्तों पर उसके प्रभाव को दर्शाया गया है। जानें कैसे क्रोध शांति को भंग करता है और इसे प्रेम व क्षमा से कैसे बुझाया जा सकता है।
शोला: चिंगारी, छोटी आग भस्म करती: राख कर देती है, नष्ट कर देती है क्षणिक आवेश: पल भर का गुस्सा दामन छोड़: त्याग देना, छोड़ देना
लपटों: ज्वाला, आग की लपटें मल जाता है: नष्ट हो जाता है, खराब हो जाता है बेताबी: बेचैनी, अधीरता घुटन: दम घुटने जैसा महसूस होना, घुटन सुलग जाता है: फिर से जल उठता है, टीस उठती है साया ढले: प्रभाव कम हो, अँधेरा हटे
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