इश्क़ की दास्ताँ: एक दिलकश ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई इश्क़ की दास्ताँ, एक खूबसूरत हिंदी ग़ज़ल जो प्यार के एहसास को बयां करती है।

Friday, September 18, 2026
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इश्क़ की दास्ताँ: एक दिलकश ग़ज़ल
“इश्क़ की दास्ताँ: एक दिलकश ग़ज़ल”
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18 September 2026
इश्क़ की दास्ताँ: एक दिलकश ग़ज़ल
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी सूरत का नूर, क्या कहने, हर तरफ़ तेरा ही नाम है। ये दिल जो धड़कता है तेरे लिए, बस तेरे इश्क़ का पैग़ाम है। ये कैसा जादू कर दिया तूने, हर लम्हा तेरा ख़याल है। मेरी दुनिया, मेरी हयात, तू ही, मेरे जीने का ये जाम है। नज़रें मिलती हैं जब तुझसे, हर ख़्वाब हकीकत बन जाए। तेरी एक मुस्कान के बदले, दुनिया का हर सलाम है। ये ख़ामोशी भी कुछ कहती है, लबों पर जैसे कोई कलाम है। तेरे बिन जीना मुश्किल है, ये दिल तेरे ही नाम है।
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी आँखों में जो नशा है, वो दुनिया में कहीं नहीं। मेरी हर धड़कन में तू ही, जैसे कोई ख़ास ख़बर है। तेरा चेहरा जब से देखा, दिल को तेरी लगन लगी है। ये कैसा तेरा हुस्न, जिसका मुझ पर गहरा असर है। तेरे बिन हर पल अधूरा, जीने की कोई वजह नहीं। तू मेरी ज़िंदगी का नूर, तू ही मेरा शहर है। आ जा मेरे पास तू, ये दिल तुझे पुकारता है। तुझसे मिलने की आरज़ू, हर पल, हर पहर है।

नूर: रोशनी, सूरत: चेहरा, पैग़ाम: संदेश, हयात: जीवन, ख़याल: विचार, कलाम: बात, लब: होंठ

नशा: मदहोशी, लगन: चाहत, हुस्न: सुंदरता, वजह: कारण, नूर: रोशनी, पहर: समय

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Zainab
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