सफ़र की लौ: प्रेरणादायक हिंदी ग़ज़ल - हिम्मत और उम्मीद

फ़ुरकान एस खान की प्रेरणादायक ग़ज़ल "सफ़र की लौ" पढ़ें। यह ग़ज़ल आपको जीवन की मुश्किलों में भी हिम्मत रखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

Thursday, September 17, 2026
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सफ़र की लौ: प्रेरणादायक हिंदी ग़ज़ल - हिम्मत और उम्मीद
“सफ़र की लौ: प्रेरणादायक हिंदी ग़ज़ल - हिम्मत और उम्मीद”
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17 September 2026
सफ़र की लौ: प्रेरणादायक हिंदी ग़ज़ल - हिम्मत और उम्मीद
Ghazal — By Furkan S Khan
जो गिर गए हो तो क्या, फिर से उठना ही तुम्हारी राह है, नज़र उठाओ, सामने मंज़िल की नई इक निगाह है। हर ठोकर इक सबक है, हर दर्द इक नया साथी, बस दिल में हौसला हो, तो मुश्किल में भी इक चाह है। न खोना तुम अपनी हिम्मत, ये दुनिया बड़ी बेपरवाह है, खुद पर भरोसा रख, यही जीवन की सच्ची पनाह है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, हिम्मत न हारो, बस चलते रहो, हर अंधेरी रात के बाद, नई सुबह की एक आह है।
Ghazal — By Furkan S Khan
हर मुश्किल को अपनी ताक़त का पैमाना दिखाना, जो टूट भी जाओ तो फिर से उठकर ज़माना दिखाना। क्यों डरते हो राह के काँटों से, मंज़िल करीब है, बस चलना शुरू करो, अपना जज़्बा सुहाना दिखाना। जो लोग कहें हार जाओगे, उन पर न करना यक़ीं, अपने कर्म से तुम उनको अपनी जीत का तराना दिखाना। 'फ़ुरकान' कहते हैं, न रुकना कभी किसी मोड़ पर, हर मोड़ को अपनी हिम्मत का फ़साना दिखाना।

राह: रास्ता निगाह: दृष्टि, नज़र चाह: इच्छा, चाहत पनाह: शरण, आश्रय आह: लंबी साँस, पुकार (यहाँ आशा के संदर्भ में) बेपरवाह: लापरवाह

पैमाना: मापदंड, पैमाना ज़माना: दुनिया जज़्बा: उत्साह, जोश सुहाना: मनभावन, सुंदर यक़ीं: विश्वास तराना: गीत, धुन फ़साना: कहानी, कथा

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Zainab
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