ज़िंदगी के सफ़र में तन्हाई: एक दर्द भरी शायरी
एक दिल को छू लेने वाली शायरी जो ज़िंदगी के सफ़र में तन्हाई और अकेलेपन के अहसास को बयां करती है।
हर मोड़ पर तन्हाई का अहसास है,
जैसे भीड़ में भी मैं अकेला हूँ।
ज़िंदगी का ये कैसा मेला है,
हर चेहरे पर अनजानापन है, मैं किससे मिला हूँ।
Kaafiya अकेला, मेला
Radeef हूँ
F
Poetry ByFurkan S Khan
वो बीते लम्हे अब भी दिल में बसे हैं,
यादों के साये मुझको घेरे हैं।
कैसे भूल जाऊं वो पल सारे,
हर आहट में बस तुमको ढूँढते हैं।
Kaafiya बीते, समेटे
Radeef हैं
F
Poetry ByFurkan S Khan
लबों पर खामोशी, आँखों में अश्क हैं,
दिल के दर्द से हम कितने परेशां हैं।
टूटे हुए सपनों का शोर है इतना,
हर रात जुगनुओं की तरह बेताब हैं।
Kaafiya अश्क, परेशां
Radeef हैं
F
Poetry ByFurkan S Khan
ज़िंदगी का सफ़र
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: अकेला, मेला | Radeef: हूँ
हर मोड़ पर तन्हाई का अहसास है,
जैसे भीड़ में भी मैं अकेला हूँ।
ज़िंदगी का ये कैसा मेला है,
हर चेहरे पर अनजानापन है, मैं किससे मिला हूँ।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: बीते, समेटे | Radeef: हैं
वो बीते लम्हे अब भी दिल में बसे हैं,
यादों के साये मुझको घेरे हैं।
कैसे भूल जाऊं वो पल सारे,
हर आहट में बस तुमको ढूँढते हैं।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: अश्क, परेशां | Radeef: हैं
लबों पर खामोशी, आँखों में अश्क हैं,
दिल के दर्द से हम कितने परेशां हैं।
टूटे हुए सपनों का शोर है इतना,
हर रात जुगनुओं की तरह बेताब हैं।
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