ज़िंदगी की पहेली: फ़ुरकान एस ख़ान की खूबसूरत ग़ज़ल

फ़ुरकान एस ख़ान द्वारा रचित 'ज़िंदगी की पहेली' एक दिल छू लेने वाली ग़ज़ल है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं, उसके रहस्यों और अनुभवों को बयां करती है।

Wednesday, August 26, 2026
AMP 0 4
ह
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
ज़िंदगी की पहेली: फ़ुरकान एस ख़ान की खूबसूरत ग़ज़ल
“ज़िंदगी की पहेली: फ़ुरकान एस ख़ान की खूबसूरत ग़ज़ल”
Favicon
Vews
https://vews.in/hum-aur-zindagi/zindagi-ki-paheli-furkan-s-khans-beautiful-ghazal
Date
26 August 2026
ज़िंदगी की पहेली: फ़ुरकान एस ख़ान की खूबसूरत ग़ज़ल
Ghazal
ये ज़िंदगी है क्या, इसका किसी को क्या पता? कभी खुशी है ये, कभी गम की है दवा। हर साँस में छुपी है, एक नई सी सज़ा, ये वक्त का दरिया है, बहता चला गया। क्या ढूँढता है बंदे, इस जहाँ में तू, जो साथ छोड़ जाए, ऐसी है ये हवा। हर मोड़ पर मिलती है, एक नई कहानी, किस बात की है हसरत, किस बात की वफ़ा। ये ज़िंदगी का मेला, है एक अजीब तमाशा, कौन अपना है यहाँ, कौन बेगाना, क्या पता?
Kaafiya पता, दवा, सज़ा, हवा, वफ़ा Radeef क्या
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
ये ज़िंदगी का दरिया, जिसका न कोई किनारा है। हर भँवर में डूबने को, एक नया सहारा है। कभी धूप है, कभी छाँव, ये कैसा नज़ारा है, हर पल बदलता रंग, इसका यही इशारा है। जो चला गया सो गया, जो रहा वो हमारा है, इस भीड़ भरी दुनिया में, कौन किसको प्यारा है। गम को भी हँस के सहना, अब हमें गवारा है, क्योंकि हर दर्द के पीछे, छिपा कोई नज़ारा है। फुरकान! ये ज़िंदगी तो, बस एक खेल सारा है, जिसने समझा इसे, उसने ही खुद को सँवारा है।
Kaafiya किनारा, सहारा, नज़ारा, इशारा, प्यारा, गवारा, सारा, सँवारा Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

ज़िंदगी की पहेली

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: पता, दवा, सज़ा, हवा, वफ़ा  |  Radeef: क्या
ये ज़िंदगी है क्या, इसका किसी को क्या पता? कभी खुशी है ये, कभी गम की है दवा। हर साँस में छुपी है, एक नई सी सज़ा, ये वक्त का दरिया है, बहता चला गया। क्या ढूँढता है बंदे, इस जहाँ में तू, जो साथ छोड़ जाए, ऐसी है ये हवा। हर मोड़ पर मिलती है, एक नई कहानी, किस बात की है हसरत, किस बात की वफ़ा। ये ज़िंदगी का मेला, है एक अजीब तमाशा, कौन अपना है यहाँ, कौन बेगाना, क्या पता?

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: किनारा, सहारा, नज़ारा, इशारा, प्यारा, गवारा, सारा, सँवारा  |  Radeef: है
ये ज़िंदगी का दरिया, जिसका न कोई किनारा है। हर भँवर में डूबने को, एक नया सहारा है। कभी धूप है, कभी छाँव, ये कैसा नज़ारा है, हर पल बदलता रंग, इसका यही इशारा है। जो चला गया सो गया, जो रहा वो हमारा है, इस भीड़ भरी दुनिया में, कौन किसको प्यारा है। गम को भी हँस के सहना, अब हमें गवारा है, क्योंकि हर दर्द के पीछे, छिपा कोई नज़ारा है। फुरकान! ये ज़िंदगी तो, बस एक खेल सारा है, जिसने समझा इसे, उसने ही खुद को सँवारा है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab Khatoon
लेखक

A passionate content creator sharing meaningful baby names, Islamic names and their beautiful meanings, along with the latest news and informative stories. Bringing knowledge, culture, and updates together.

Comments (0)

User