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सहारनपुर विवाद: सांसद इकरा हसन और एडीएम संतोष बहादुर सिंह के बीच टकराव की पड़ताल

सहारनपुर में सांसद इकरा हसन और एडीएम संतोष बहादुर सिंह के बीच विवाद की सच्चाई की तथ्यात्मक जांच। पढ़ें पूरी खबर।

Furkan S Khan
Furkan S Khan
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Friday, July 18, 2025
12 months ago
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सहारनपुर विवाद: सांसद इकरा हसन और एडीएम संतोष बहादुर सिंह के बीच टकराव की पड़ताल
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18 July 2025
सहारनपुर विवाद: सांसद इकरा हसन और एडीएम संतोष बहादुर सिंह के बीच टकराव की पड़ताल
सांसद इकरा हसन और एडीएम संतोष बहादुर सिंह के बीच टकराव

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"गेट आउट!! ये दफ़्तर मेरा है, मैं जो चाहूं कर सकता हूँ।"

False Misleading Half True True
Claim: True

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Fact Checked By फ़ुरकान एस. ख़ान

विवाद की शुरुआत

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा हसन ने स्थानीय अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) संतोष बहादुर सिंह पर अभद्र व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है। यह घटना 1 जुलाई 2025 को तब हुई जब सांसद ने छुटमलपुर नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन के साथ क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा के लिए एडीएम कार्यालय का दौरा किया। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

दावों और प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण

इकरा हसन ने आरोप लगाया कि दोपहर 3 बजे हुई मुलाकात के दौरान एडीएम ने उन्हें और शमा परवीन को कार्यालय से बाहर निकलने के लिए कहा, जिसमें अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। सांसद ने इस घटना की शिकायत मंडलायुक्त अटल कुमार राय और प्रमुख सचिव (नियुक्ति) को लिखित रूप में दी, जिसके बाद मंडलायुक्त ने जिला मजिस्ट्रेट मनीष बंसल से जांच के आदेश दिए।

दूसरी ओर, एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सांसद का पूरा सम्मान किया और घटना के समय वे मैदान में थे। उन्होंने दावा किया कि सांसद के आरोप निराधार हैं और उनकी ओर से कोई दुर्व्यवहार नहीं हुआ।

प्रमाण और तथ्य

वर्तमान में इस घटना का कोई वीडियो या ऑडियो सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है, जिससे दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल हो रही है। हालांकि, सांसद की शिकायत और गवाह शमा परवीन की मौजूदगी इस दावे को कुछ हद तक बल देती है। दूसरी ओर, एडीएम के बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं, जिससे उनकी स्थिति संदिग्ध बनी हुई है।

समाचार एजेंसियों, जिसमें हिंदुस्तान टाइम्स (17 जुलाई 2025) शामिल है, ने सांसद के बयान को उद्धृत किया है, जिसमें उन्होंने एडीएम के व्यवहार को "अपमानजनक" और "असम्मानजनक" बताया।

संक्रमण और ऐतिहासिक संदर्भ

उत्तर प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 15% सांसद-आधिकारी बातचीत में दुर्व्यवहार की शिकायतें दर्ज की गईं, जो इस घटना को व्यापक संदर्भ में रखता है। इस विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी जन्म दिया है, जिसमें कुछ लोग इसे धार्मिक पूर्वाग्रह से जोड़ रहे हैं।

वर्तमान स्थिति और आगे की राह

मंडलायुक्त द्वारा शुरू की गई जांच अभी लंबित है, और निष्कर्ष आने तक निश्चित राय बनाना जल्दबाजी होगी। इस बीच, दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास देखा जा रहा है, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वतंत्र और पारदर्शी जांच ही इस मामले में सच्चाई सामने ला सकती है।

वर्तमान में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर, इकरा हसन के अभद्र व्यवहार के दावे को कुछ गवाहियों और शिकायतों से समर्थन मिलता है, लेकिन एडीएम के बचाव में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इस घटना की सच्चाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। यह मामला लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच संतुलन को परखने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, ISMA टाइम्स, लाइव हिंदुस्तान (16-17 जुलाई 2025); भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, 2022 रिपोर्ट; मंडलायुक्त कार्यालय, सहारनपुर।