जंतर-मंतर पर 'टूटे नहीं, झुके नहीं': एक पिता, भगत सिंह का प्रशंसक और छात्र की कहानी

जंतर-मंतर पर एक असाधारण व्यक्ति की कहानी: एक पिता, भगत सिंह प्रशंसक और छात्र, जो चुनौतियों के बावजूद अपनी बात रखने को प्रतिबद्ध है।

Thursday, July 23, 2026
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जंतर-मंतर पर 'टूटे नहीं, झुके नहीं': एक पिता, भगत सिंह का प्रशंसक और छात्र की कहानी
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23 July 2026
जंतर-मंतर पर 'टूटे नहीं, झुके नहीं': एक पिता, भगत सिंह का प्रशंसक और छात्र की कहानी

मुख्य बातें

  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक व्यक्ति की कहानी जिसने पिता, छात्र और भगत सिंह प्रशंसक की अपनी पहचान से सबको प्रेरित किया।
  • चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद उनका दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास।
  • शांत विरोध और विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जंतर-मंतर के महत्व को रेखांकित किया गया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर, जहाँ अक्सर विभिन्न आवाज़ें उठती हैं, एक ऐसी कहानी सामने आई है जो संघर्ष और अटूट भावना की मिसाल है। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो एक ही समय में एक पिता, एक छात्र और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का सच्चा प्रशंसक है। वह खुद को 'टूटा हुआ नहीं, बस थोड़ा घायल' बताता है, लेकिन उसका हौसला बिल्कुल अडिग है।

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Zainab Khatoon
लेखक

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